1. Intro: Carbon evan uske Yaugik
Carbon evan uske Yaugik प्रिय विद्यार्थियों! JPathshala पर आपका स्वागत है। JAC बोर्ड 2026-27 के नए पाठ्यक्रम के अनुसार, आज हम कक्षा 10 विज्ञान का चौथा अध्याय Carbon and its Compounds (कार्बन एवं उसके यौगिक) विस्तार से समझेंगे। भोजन, कपड़े, दवाइयाँ, पुस्तकें—यहाँ तक कि हमारा शरीर भी कार्बन पर ही आधारित है। भूपर्पटी में केवल 0.02% और वायुमंडल में 0.03% कार्बन होने के बावजूद, इसका महत्व बहुत अधिक है। इस पोस्ट में हम Rank Math SEO के मानकों को ध्यान में रखते हुए पूरे अध्याय के महत्वपूर्ण नोट्स, 1 अंक स्तरीय प्रश्न, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और परीक्षा के लिए उपयोगी वर्णनात्मक प्रश्न-उत्तर कवर करेंगे।
2. Complete Notes
कार्बन में आबंधन: सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
कार्बन की परमाणु संख्या 6 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 होता है। इसकी बाहरी कक्षा में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं (अर्थात इसकी संयोजकता 4 है)।
- उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए इसे 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने (C4- ऋणायन) या 4 इलेक्ट्रॉन खोने (C4+ धनायन) की आवश्यकता होती है, जो अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता के कारण बहुत कठिन है।
- इसलिए, कार्बन अपने या अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके सहसंयोजी आबंध बनाता है।
कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon)
हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या मौजूद है, इसके दो मुख्य कारण हैं:
- श्रृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है, जिससे लंबी श्रृंखला वाले अणु बनते हैं।
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 है। यह कार्बन के 4 अन्य परमाणुओं या ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन आदि के साथ आसानी से आबंध बना सकता है।
कार्बन के अपरूप (Allotropes of Carbon)
- हीरा (Diamond): यह सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। यह विद्युत का कुचालक होता है। इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
- ग्रेफाइट (Graphite): यह मुलायम और चिकना होता है। यह विद्युत का सुचालक होता है। इसका उपयोग पेंसिल की लीड बनाने में होता है।
- फुलरिन (Fullerene): यह कार्बन का एक अन्य अपरूप है। C-60 सबसे पहला पहचाना गया फुलरिन है, जिसकी आकृति फुटबॉल जैसी होती है।
हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- संतृप्त (Saturated): जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध (Single Bond) होता है। इन्हें एल्केन (Alkane) कहते हैं। सामान्य सूत्र: CnH2n+2
- असंतृप्त (Unsaturated): जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि-आबंध (Double) या त्रि-आबंध (Triple Bond) होता है। द्वि-आबंध वालों को एल्कीन (Alkene, सूत्र: CnH2n) और त्रि-आबंध वालों को एल्काइन (Alkyne, सूत्र: CnH2n-2) कहते हैं।
प्रकार्यात्मक समूह (Functional Groups)
हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करने वाले विषम परमाणु (जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन) जो यौगिक को विशिष्ट गुण प्रदान करते हैं, प्रकार्यात्मक समूह कहलाते हैं।
- हैलोजन: क्लोरो (-Cl), ब्रोमो (-Br)
- ऐल्कोहॉल (Alcohol): -OH
- ऐल्डिहाइड (Aldehyde): -CHO
- कीटोन (Ketone): -CO-
- कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid): -COOH
समजातीय श्रेणी (Homologous Series)
यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें एक ही प्रकार्यात्मक समूह होता है और जिसके किन्हीं भी दो क्रमागत सदस्यों के आणविक सूत्रों के बीच -CH2 का अंतर होता है। (जैसे: मेथेन CH4, एथेन C2H6, प्रोपेन C3H8)।
कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म
- दहन (Combustion): कार्बन यौगिक ऑक्सीजन में जलकर CO2, ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
- ऑक्सीकरण (Oxidation): क्षारीय KMnO4 की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल, कार्बोक्सिलिक अम्ल में बदल जाते हैं।
- संकलन (Addition): पैलेडियम या निकेल जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाया जाता है (हाइड्रोजनीकरण)।
- प्रतिस्थापन (Substitution): सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन, संतृप्त हाइड्रोकार्बन से हाइड्रोजन को एक-एक करके हटा देती है।
साबुन और अपमार्जक (Soaps and Detergents)
- साबुन: यह लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। यह कठोर जल में अच्छी तरह काम नहीं करते।
- अपमार्जक: यह सल्फॉनिक अम्लों के सोडियम लवण होते हैं। ये कठोर जल में भी आसानी से झाग बनाते हैं।
- मिसेल (Micelle): साबुन के अणुओं का वह गोलाकार गुच्छा, जिसका जलरागी सिरा (Hydrophilic) पानी की ओर और जलविरागी सिरा (Hydrophobic) मैल या तेल की ओर होता है। यही मिसेल कपड़े साफ करने में मदद करता है।
1 अंक स्तरीय प्रश्न तथा उत्तर (1 Mark Questions)
बहुविकल्पीय प्रश्न (15 MCQs)
वर्णनात्मक प्रश्न-उत्तर (Subjective Questions)
1) श्रृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है, जिससे बड़ी संख्या में अणु बनते हैं。
2) चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है। इसलिए यह कार्बन के चार अन्य परमाणुओं अथवा अन्य एक संयोजक तत्वों के परमाणुओं के साथ आबंध बना सकता है।
उदाहरण: ऐल्कोहॉल की समजातीय श्रेणी: CH3OH, C2H5OH, C3H7OH आदि।
1) संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated): जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध (Single bond) होता है। (उदा: एल्केन)
2) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated): जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि-आबंध (Double bond) या त्रि-आबंध (Triple bond) होता है। (उदा: एल्कीन और एल्काइन)
औद्योगिक अनुप्रयोग: इस प्रक्रिया का उपयोग उद्योगों में वनस्पति तेलों (Liquid) से वनस्पति घी (ठोस) बनाने में किया जाता है।
अपमार्जक: यह लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के अमोनियम एवं सल्फोनेट लवण होते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी अच्छी तरह से सफाई (झाग) कर सकते हैं।
उदाहरण: क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) या अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) एल्कोहॉल को कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देते हैं।
1) यह एक अच्छा विलायक है, इसलिए इसका उपयोग टिंचर आयोडीन, कफ सीरप और टॉनिक आदि औषधियों में होता है।
2) इसका उपयोग पीने वाले एल्कोहलिक पेय (शराब) बनाने में किया जाता है।
3) उद्योगों में इसे ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
कार्बन की बाहरी कक्षा में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं (संयोजकता 4)। उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए इसे 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या खोने की आवश्यकता होती है, जो ऊर्जा के दृष्टिकोण से बहुत कठिन है। इसलिए, कार्बन अपने या अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजक आबंध बनाता है।
1) कार्बन परमाणुओं के बीच प्रबल आकर्षण बल नहीं होता है।
2) ये यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं।
| सामान्य नाम (Common Name) | IUPAC नाम |
|---|---|
| 1. एसिटोन | प्रोपेनोन |
| 2. मिथाइल ब्रोमाइड | ब्रोमो मेथेन |
| 3. एसिटिक अम्ल | एथेनॉइक अम्ल |
1. एथेनॉइक अम्ल
2. ब्रोमोपेंटेन
3. ब्यूटेनोन
4. हेक्सेनैल
दो यौगिक: (1) CH4 (मीथेन) (2) NH3 (अमोनिया)
1) इनमें क्वथनांक व गलनांक कम होते हैं।
2) ये सामान्यतः गैस या द्रव अवस्था में होते हैं।
3) ये ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं।
1) कार्बन परमाणुओं के बीच प्रबल आकर्षण बल नहीं होता है।
2) इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह से त्यागने या ग्रहण करने में अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3) ये यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं।
5 अंक स्तरीय प्रश्न तथा उत्तर (Long Answer Type)
| संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated) | असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated) |
|---|---|
| 1. वैसे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं की चारों संयोजकताएं केवल एकल बंधन (Single bond) द्वारा संतुष्ट रहती हैं, उसे संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं। | 1. वैसे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच द्विआबंध (Double) या त्रिआबंध (Triple bond) होता है, उसे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं। |
| 2. ये बहुत कम अभिक्रियाशील होते हैं। | 2. ये अधिक अभिक्रियाशील होते हैं। |
| 3. इसका सामान्य सूत्र CnH2n+2 होता है, जहां n = 1, 2, 3… आदि। | 3. इसमें द्विबन्ध वाले का सामान्य सूत्र CnH2n होता है और त्रिबंध वाले का CnH2n-2 होता है। जहां n = 2, 3, 4… आदि। |
| 4. इन्हें एल्केन (Alkane) कहते हैं। | 4. इसमें द्विबन्ध वाले को एल्कीन (Alkene) एवं त्रिबंध वाले को एल्काइन (Alkyne) कहते हैं। |
| 5. इसका प्रथम सदस्य मेथेन (Methane) है। | 5. इसमें द्विबन्ध वाले का प्रथम सदस्य एथीन (Ethene) और त्रिबंध वाले का एथाइन (Ethyne) है। |
साबुन के अणु के 2 मुख्य भाग होते हैं- एक जलरागी (Hydrophilic) और दूसरा जलविरागी (Hydrophobic)। कार्बन श्रृंखला वाला भाग जलविरागी होता है, जबकि आयनिक भाग (सोडियम या पोटेशियम) जलरागी होता है। जब इन्हें पानी जैसे ध्रुवीय विलायक में डाला जाता है, तो जलरागी भाग पानी की ओर (बाहर) आकर्षित होता है और जलविरागी भाग पानी से दूर (अंदर की ओर) रहता है। इसी विशेष व्यवस्था के कारण मिसेल बनते हैं。
एथेनॉल एक अध्रुवीय विलायक है, अतः इसमें जलरागी भाग के लिए आकर्षण नहीं होता है। इसलिए, एथेनॉल में साबुन घोलने पर मिसेल का निर्माण नहीं होगा।
| साबुन (Soap) | अपमार्जक (Detergent) |
|---|---|
| 1. यह उच्च वसा अम्लों (Fatty acids) के सोडियम या पोटैशियम लवण हैं। | 1. यह लंबी शृंखला वाले सल्फॉनिक अम्लों के सोडियम लवण हैं। |
| 2. इसका आयनिक सिरा -COO–Na+ होता है। | 2. इसका आयनिक सिरा -SO3–Na+ या -SO4–Na+ होता है। |
| 3. इसका जैव अपघटन (Biodegradation) आसानी से हो जाता है। इसलिए यह जल प्रदूषण उत्पन्न नहीं करते हैं। | 3. इसका जैव अपघटन आसानी से नहीं होता है। इसलिए यह जल प्रदूषण उत्पन्न कर सकते हैं। |
| 4. यह कठोर जल में कठिनाई से झाग देता है। | 4. यह कठोर जल में भी आसानी से झाग देता है। |
| 5. इसमें आर्द्रता का गुण कम पाया जाता है। | 5. इसमें आर्द्रता का गुण अधिक पाया जाता है। |
जब साबुन जल की सतह पर होता है, तब इसके अणु अपने को इस प्रकार व्यवस्थित कर लेते हैं कि इसका आयनिक सिरा जल के अंदर होता है जबकि हाइड्रोकार्बनिक पूँछ (दूसरा छोर) जल के बाहर होती है। जल के अंदर इन अणुओं का एक बड़ा गुच्छा बन जाता है, जिससे जलविरागी पूँछ गुच्छे के आंतरिक हिस्से (केंद्र) में होती है जबकि उसका आयनिक सिरा सतह पर होता है। इस संरचना को ‘मिसेल’ कहते हैं。
तैलीय मैल (गंदगी) मिसेल के केंद्र में एकत्र हो जाती है। मिसेल विलयन में कोलाइड के रूप में बने रहते हैं तथा आयन-आयन विकर्षण के कारण वे अवक्षेपित नहीं होते। इस प्रकार साबुन का मिसेल मैल को पानी में घुलाकर बाहर निकाल देता है और कपड़े साफ हो जाते हैं।
उत्कृष्ट (अक्रिय) गैस जैसी स्थायी संरचना प्राप्त करने के लिए इसे 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने (C4- ऋणायन बनाने) या 4 इलेक्ट्रॉन त्यागने (C4+ धनायन बनाने) की आवश्यकता होती है, जिसके लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है और यह संभव नहीं है। अतः, कार्बन परमाणु अन्य परमाणुओं के साथ अपने इलेक्ट्रॉनों का साझा (Sharing) करके ही स्थायी संरचना प्राप्त कर सकता है। इसी कारण कार्बन परमाणु हमेशा इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजी आबंध (Covalent bond) बनाता है।