पद: Pad Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 1 NCERT Solutions

Pad Class 10 Hindi Chapter 1 NCERT Questions Answers. Hindi Class 10 Chapter 1 Exam Help and Notes. Kshitz Class 10 Chapter 1 Important Questions Answers.

अभ्यास : pad class 10 poem

Q.1.गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

Ans: गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने के पीछे व्यंग्य निहित है, कि उद्धव ने कभी किसी से प्यार नहीं किया इसलिए वह गोपियों की विरह – पीड़ा को नहीं समझ पा रहा है, की गोपियो को श्री कृष्ण से दूर हो कर कीतना पीड़ा हो रहा है, उद्धव को गोपियों की पीड़ा का अहसास नहीं हो रहा है। इस प्रकार गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में व्यंग्य निहित हैं।

Q.2.उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किससे की गई है?
Ans:
उद्धव के व्यवहार की तुलना इस प्रकार की गई है –

  • उद्धव की व्यवहार की तुलना कमल के पत्ते के सामान की गई है। जिस प्रकार कमल जल में रहते हैं पर फिर भी जल का प्रभाव कमल के पत्तों पर नहीं पड़ता। इसी प्रकार उद्धव पर श्री कृष्ण के प्रेम का प्रभाव उद्धव पर नहीं पड़ सका।
  • उद्धव की दशा उस तेल की गागर के समान है जो जल में रहती है, पर उस पर पानी की एक बूंद भी नहीं टिक पाती। इसी प्रकार उद्धव कृष्ण के पास रहते हुए भी उनके प्रेम से अछूते रहें।

Q.3.गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव उलाहने दिए हैं?
Ans:
गोपियों ने निम्नलिखित उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं-

  • गोपियां श्री कृष्ण के आने इंतजार मैं जी रही थी, परंतु श्री कृष्णा स्वयं न आकर योग – संदेश उद्धव के द्वारा भिजवा दिया। इससे गोपियों की विरह – व्यथा और अधिक बढ़ जाती है।
  • गोपियों को यह आशा थी कि श्री कृष्ण गोपियों की प्रेम की मर्यादा को रखेंगे। श्री कृष्ण उनके प्रेम का बदला प्रेम से देंगे, परंतु उन्होंने उद्धव के द्वारा योग – संदेश भेजकर प्रेम की मर्यादा ही तोड़ डाली।

Q.4.उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?
Ans:
ब्रज की गोपियां इस आशा मैं बैठी थी कि देर – सवेर कृष्ण उनसे मिलने जरूर आएंगे, या तो अपना प्रेम – संदेश भेजेंगे। इसी से गोपियां तृप्त हो जाएंगी। इस प्रतीक्षा के बल पर वे वियोग की वेदना सह रही थी। किंतु जैसे ही उनके पास कृष्ण द्वारा भेजा गया योग – संदेश पहुंचा, गोपियां तड़प उठी उनकी विरह – ज्वाला तीव्रता से भड़क उठी। उन्हें लगा कि अब कृष्ण उनके पास नहीं आएंगे। कृष्ण योग – संदेश में ही भटकाकर उनसे अपना पीछा छुड़ा लेंगे। इस भय से उनकी विरहग्नि भड़क उठी। इस प्रकार उद्धव द्वारा भेजा गया योग – संदेश गोपियों की विरहग्नि में घी का काम किया।

Q.5.’मरजादा न लही’ के मध्यम से कौन – सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?
Ans:
गोपियां अभी तक मर्यादा का पालन करते हुए चुपचाप बस कृष्ण – वियोग की पीड़ा को झेल रही थी। इस आश में की श्री कृष्ण आयेंगे। अब जबकि कृष्ण ने उद्धव के माध्यम से योग का संदेश भिजवा दिया है तब सारी मर्यादा समाप्त हो गई। अब वे भला किस मर्यादा का पालन करें? अब तो उनकी मान – मर्यादा भी समाप्त हो गयी।

Q.6.कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?
Ans:
गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को निम्नलिखित तरीकों से व्यक्त किया है –

  • गोपियां स्वयं को कृष्ण रूपी गुड पर लिपटी हुई चींटी के समान कहती है। जैसे – चींटी गुड़ से लिपटी हुई रहती है, ठीक उसी प्रकार गोपियां कृष्ण के प्रेम से लिपटी हुई है।
  • वे स्वयं को हारिल पंक्षी के समान कहती है जिसने कृष्ण – प्रेम रूपी लकड़ी को दृढ़ता से थामा हुआ है। गोपियां भी कृष्ण के प्रेम में इसी प्रकार है।
  • गोपियां जागते – सोते, दिन – रात यहां तक की सपने में भी कृष्ण का नाम रटती रहती है।
  • श्री कृष्ण से दूर ले योग जाने वाले योग – संदेश को सुनते ही गोपियां व्यथित हो उठती है। गोपियो सपनों में भी श्री कृष्ण से दूर होने के बारे में नहीं सोच सकती।
  • गोपियो मन, वचन और कर्म से कृष्ण को अपने मन में धारण किए हुए हैं।

Q.7.गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?
Ans:
गोपियों ने उद्धव को कहा है कि वे अपने योग की शिक्षा उनलोगों को दें जिनके मन स्थिर नहीं है। जिनके हृदय में कृष्ण के प्रति सच्चा प्रेम नहीं है। जिनके मन में भटकाव है, दुविधा है, भ्रम है और चक्कर है। इन सब लोगों को गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा देने को कही है।

Q.8.प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग – साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।
Ans:
प्रस्तुत पदों के आधार पर कहा जा सकता है कि गोपियां योग – साधना को अपने लिए अनुपयुक्त और व्यवहारिक मानती है। क्योंकि गोपियां श्री कृष्ण के प्रेम के अलावा कुछ भी नहीं चाहती। गोपियां तो कृष्ण के प्रति एकाग्र भाव से प्रेम – भक्ति रखती है अतः उनके लिए इसका कोई उपयोग नहीं है। गोपियों की दृष्टि में योग – साधना कड़वी ककड़ी के समान है, जिसे निगला नहीं जा सकता। योग – साधना एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में उन्होंने न कभी पहले सुना और न कभी देखा। हां बल्कि, यह योग – साधना उनके लिए उपयोगी हो सकती है जिनका चित्त अस्थिर रहता है। ऐसे लोगों को योग – साधना देनी चाहिए।

Q.9.गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?
Ans:
गोपियों के अनुसार राजा का धर्म प्रजा की रक्षा करना, उनकी देखभाल करना, उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना, उसके आत्मविश्वास को चोट न पहुंचाना, अपनी प्रजा को किसी भी प्रकार का कष्ट न देना और प्रजा को कभी नहीं सताना ये सब राजा का धर्म होना चाहिए। तभी वह एक श्रेष्ठ राजा कहलाऐगा।

Q.10.गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन – से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती है?
Ans:
गोपियों ने श्री कृष्ण के स्वभाव में निम्नलिखित परिवर्तन देखें-

  • श्री कृष्णा अब भोले – सरल न रहकर राजनीतिज्ञ बन गए हैं।
  • गोपियों के अनुसार श्री कृष्णा ने बहुत सारे ग्रंथ पढ़ लिए हैं और अधिक बुद्धिमान भी प्रतीत होने लगे हैं।
  • श्री कृष्ण अब प्रेम के स्थान पर योग की बातें करने लगे हैं। जो गोपियों को बिल्कुल नहीं पसंद।
  • श्री कृष्णा अब राजधर्म की उपेक्षा करने लगे हैं।

Q.11.गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य विशेषताएं लिखें।
Ans
:गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य से ज्ञानी उद्धव को परास्त कर देती हैं। गोपियों की वाक्चातुर्य की विशेषताएं निम्नलिखित है –

  • गोपियां तर्कशील है। गोपियां अपने तर्क से उद्धव को परास्त कर देती है।
  • व्यंग्य का सहारा लेकर गोपियों ने अपने वाक्चतुर्य को जबरदस्त बना देती है।
  • गोपियां के वाक्चातुर्य में दृष्टांतो की भरमार रहती है। गोपियां के दृष्टांत अत्यधिक सटीक रहती है।
  • गोपियां बातें बनाने में माहिर हैं। गोपियां अपने बातों से उद्धव को खरी-खोटी सुनाकर उद्धव की बोलती बंद करा देती है।

Q.12.संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएं बताएं।
Ans:
अनेक कवियों ने ‘ भ्रमरगीत’ लिखे हैं, परंतु सूरदास का भ्रमरगीत विशिष्ट कोटि में से एक है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं –

  • सूरदास के ‘भ्रमरगीत’ में वियोग श्रृंगार का अत्याधिक हृदयग्राही रूप को दिखाया गया है।
  • सूरदास का ‘भ्रमरगीत’ में गोपियों के वाक्चातुर्य की पराकाष्ठा को दर्शाया गया है।
  • सूरदास के ‘भ्रमरगीत’ गोपियों का श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाती है। गोपियां निस्वार्थ रूप से कृष्ण से प्रेम करती है।
  • सूरदास के भ्रमरगीत में विरह व्यथा का मार्किक वर्णन किया गया है।
  • इस ‘भ्रमरगीत’ में गोपियों को तर्कशील दिखाया गया है। जिससे गोपियां ज्ञानी उद्धव को भी अपनी तर्क से परास्त कर देती है।
  • सूरदास के ‘भ्रमरगीत’ में वचन – वक्रता का भी विशेष रूप दिखाया गया है।

रचना और अभिव्यक्ति : pad class 10

Q.13.गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए।

Ans:गोपियों ने उद्धव को निम्नलिखित तर्क दिए हैं-

  • श्री कृष्ण ने तो हम गोपियों से मिलने का वादा किया था, परंतु श्री कृष्ण ने न ही प्रेम धर्म को निभाया और न ही राजधर्म को।
  • योपियो के अनुसार अगर योग संदेश इतना प्रभावशाली है, तो ये योग संदेश कुब्जा को क्यों नहीं दे देते। हम गोपियों को श्री कृष्ण के प्रेम का मीठा रस चढ़ा हुआ है। तो ये योग का असर हम गोपियों पर क्या होगा।
  • योग के मार्ग में चलना हम गोपियों की बस में नहीं है हमलोग तो तन, मन से श्रीकृष्ण के हो चुके हैं। ये योग संदेश किसी ओर को जा कर दो।
  • हम गोपियों ने तो सिर्फ श्री कृष्ण से सच्चा प्रेम किया है। इसलिए ये योग साधना का संदेश हम गोपियों को देना उचित नहीं है।

Q.14.उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन – सी शक्ति थी जो उनके वाक्चतुर्य में मुखरित हो उठी?
Ans:उद्धव ज्ञानी थे, नीति की सारी बातें को जानते थे, लेकिन उद्धव में व्यवहारिकता का अभाव था। और इसका प्रयोग गोपियों ने बहुत अच्छे से किया। गोपियों के पास लौकिक ज्ञान की ऐसी शक्ति थी जो उद्धव के ज्ञान नीति में नहीं था। इसलिए गोपियों ने उद्धव से कहा था, ‘प्रीति नदी में पाऊं न बोरयों’ इसका उत्तर उद्धव के पास नहीं था। गोपियां श्री कृष्ण से अनंत प्रेम करती है, जबकि उद्धव को प्रेम जैसी अनुभूति से कोई मतलब नहीं था। गोपियों ने उद्धव को ऐसे चुप्पी स्थिति में देखकर उनकी वाक्चातुर्य और भी मुखर हो उठी।

Q.15.गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ अए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नजर आता है, स्पष्ट कीजिए।
Ans:
श्री कृष्ण गोपियों को छोड़कर मथुरा चले जाते हैं, गोपियां बस इसी आस में रहती है कि श्री कृष्ण आज आएंगे, गोपियां प्रतिदिन श्री कृष्ण के आने की प्रतीक्षा करती है, परंतु श्री कृष्ण स्वयं न अके उद्धव को भेज देते हैं एक योग संदेश देकर। गोपियां श्री कृष्ण के इस संदेश को एक छल समझती है। इसलिए गोपियां हरि को आरोप लगाती हैं कि अब हरि राजनीति पढ़ लिए हैं, क्योंकि अपना बात किसी ओर से पहुंचाना बातो को घुमा – फिरा के बोलना ये सब राजनीति में आता है। आज की राजनीति तो सिर्फ छल – कपट से ही भरा हुआ है। हर नेता बस झूठे वादे और कसमें खाते हैं, लेकिन कुछ करते नहीं हैं। इसलिए गोपियों का यह कथन समकालीन राजनीति पर सही साबित होता है।

1 ऊधौ, तुम हो अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यौं जल माहं तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।
प्रीति – नदी मैं पाऊं न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी। ‘
सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चांटी ज्यौं पागी।

(A) कवि और कविता का नाम लिखिए।
Ans:-
कवि – सूरदास, कविता – पद।

(B)उद्धव को गोपियों ने भाग्यशाली क्यों कहा है? क्या वास्तव में भाग्यशाली है? वर्णन करें।
Ans:-
गोपियों ने उद्धव को भाग्यशाली इसलिए कहा है क्योंकि उद्धव किसी से प्रेम नहीं किया है। उद्धव इस प्रेम के बंधन से स्वतंत्र है। उद्धव को कभी किसी के प्रेम के विरह की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ी है। उद्धव वास्तव में भाग्यशाली नहीं अपितु भाग्यहीन है क्योंकि उद्धव श्री कृष्ण के पास रहते हुए भी उद्धव प्रेम रस से वंचित वंचित हैं।

(C)इस कविता में कमल के पत्ते की कौन – सी विशेषता को बताया गया है?
Ans:-
इस कविता में कमल के पत्तों की विशेषता को बताया गया है कि कमल के पत्ते जल में रहते हुए भी जल से अछूता ही रहता है। कमल के पत्ते अपने ऊपर एक भी बूंद नहीं लगने देते हैं।

(D)भोली – भाली गोपियों और चीटियों में क्या समानता को दर्शाया गया है? वर्णन करें।
Ans:-
भोली – भाली गोपियां श्री कृष्ण से अनंत प्रेम करती है। गोपियां अपने प्रिय कृष्ण की रूप – माधुरी पर मोहित होकर श्री कृष्ण के प्रेम में ऐसे लीन हो गई है कि अब कभी भी गोपियां अपने श्री कृष्ण के प्रेम से विमुख नहीं हो सकती। गोपियों की ऐसी दशा उस गुड़ में चिपटी चीटियों के समान है जो एक बार गुड़ में चीपटने के बाद वह स्वयं को कभी भी वहां से मुक्त नहीं कर पाती, उसी गुड़ में अपने प्राण त्याग देती है।

(E)’सनेह तगा से अपरस रहना’ सौभाग्य है या दुर्भाग्य ? स्पष्ट करें।
Ans:-
‘सनेह तगा से दूर रहना’ मतलब प्रेम न कर पाना यह दुर्भाग्य है, सौभाग्य नहीं। गोपियों के अनुसार जीवन का वास्तविक आनंद प्रेम में ही है, संसार के किसी वस्तु में नहीं।

(F) स्वयं को कौन अबला और भोरी कह रही है?
Ans:-
गोपियां स्वयं को अबला और भोरी कह रही है।

2 मन की मन ही मांझ रही।
कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाहीं परत कही।
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोग संदेसनि सुनि – सुनि, बिरहिनि बिरह दही।
चाहति हुंती गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही। ‘
सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यौं, मरजादा न लही।।

(A) गोपिया किस कारण अपनी मन की व्यथा अब तक सह रही थी?
Ans:-
गोपियां हर वक्त कृष्ण के लौटने की आशा में थी इसीलिए गोपियां अब तक अपनी व्यथा को सह रही थी।

(B)’योग – संदेश’ से गोपियों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Ans:-
गोपियों को जब उद्धव ने योग – संदेश सुनाया तो गोपियों पर इसकी प्रतिकूल प्रक्रिया हुई। गोपियां चित्त शांत होने के बजाय विरहाग्नि में जल उठी। गोपियां श्री कृष्ण के वियोग में पहले ही तड़प रही थी। अब गोपियों की आग में इस संदेश ने घी का काम किया।

(C)गोपियां अपने मन की बात किसी से क्यों नहीं कह पा रही है?
Ans:-
गोपियां श्री कृष्ण से अत्यंत प्रेम करती है। गोपियों की विरह की पीड़ा श्री कृष्ण के अलावा और कोई नहीं समझ सकता। लेकिन श्रीकृष्ण निर्दय होकर मथुरा चले गए गोपियों को छोड़कर। गोपियां किसी ओर से अपनी विरह की बातें नहीं बता सकती क्योंकि किसी को बताने से कोई लाभ नहीं होगा।

(D)गोपियों की अब क्या दशा थी?
Ans:-
गोपियां अब कृष्ण से मिलने को उतावली हो रही थी। गोपियां अब भला धैर्य कैसे रखें अब तो मर्यादा का बंधन भी टूटता जा रहा है।

(E)’धार बही’ से क्या आशय है?
Ans:
– योग – संदेश से धार बही का आशय है। जो उद्धव गोपियों के लिए ले कर आया था।

(F)गोपियां क्या व्यथा सह रही थी और किसके लिए सह रही थी?
Ans:-
गोपियां श्री कृष्ण के वियोग की व्यथा सह रही थी। गोपियां श्री कृष्ण के लिए यह व्यथा सह रही थी कि कुछ समय बाद ही सही परंतु श्री कृष्ण अवश्य ब्रज आएंगे अपनी गोपियों से मिलने।

3 हमारैं हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद – नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस – निसि, कान्हा – कान्हा जक री।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।
सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तौ ‘सूर’ तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी।।

(A) गोपियां अपने हरि की तुलना किससे करती है और क्यों?
Ans:-
गोपियां अपने हरि की तुलना हरियल पंक्षी से करती है क्योंकि हरियल एक लकड़ी को अपने पंजों से दिन-रात थामे रहती है। वह किसी भी हाल में इस लकड़ी को छोड़ता नहीं है। गोपियों की भी यही दशा है। गोपियां दिन-रात कृष्ण के प्रेम को अपने मन में बसाए रखती है। गोपियां किसी भी हाल में कृष्ण को भुलती नहीं है। यही सब समानता के कारण गोपियां श्रीकृष्ण को हरियल की लकड़ी कहती है।

(B) गोपियों ने योग की तुलना किससे की है?
Ans:-
गोपियां योग की तुलना कड़वी ककड़ी के सामान की है, क्योंकि गोपियों के अनुसार यह स्त्रियों के लिए अव्यावहारिक है। इस योग को लिया नहीं जा सकता है।

(C) योग की आवश्यकता किसको है और क्यों? स्पष्ट करें।
Ans:-
योग की आवश्यकता उन सबको है जिसका मन चकरी की भांति चंचल हो, स्थिर न हो। योग साधना से उन सब का चंचल मन को नियंत्रण में लाया जा सकता है।

(D) गोपियों की मनोदशा को स्पष्ट करें।
Ans:-
गोपियां श्री कृष्ण के प्रेम में मोहित है। गोपियों को दिन – रात , सोते – जागते , यहां तक कि श्री कृष्ण का नाम दिन भर जपते रहती है। गोपियों को श्री कृष्ण के अलावा न कुछ नजर आता है और न ही कुछ अच्छा लगता है। गोपियों को श्री कृष्ण के सामने संसार के सारे वस्तुएं व्यर्थ लगती है।

(E) गोपियों ने योग – मार्ग के बारे में क्या बताया है?
Ans:-
गोपियों ने योग – मार्ग को एक कड़वी ककड़ी के समान ‘कटु’ और व्याधि के समान ‘बला’ बताती है। गोपियों के अनुसार यह योग – मार्ग श्री कृष्ण से दूर ले जाने वाला एक साधन है इसलिए गोपियों ने इसे व्यर्थ माना है।

4 हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।
समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।
इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।
बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग – संदेस पठाए।
ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।
अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।
ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।
राज धरम तौ यहै ‘सूर’, जो प्रजा न जहिं सताए।।

(A)गोपियों ने किस पर और क्या कटाक्ष की हैं?
Ans:
गोपियों ने श्री कृष्ण पर कटाक्ष करते हुए कहती है कि अब श्रीकृष्ण ने भी राजनीति का पाठ पढ़ लिया है अर्थात श्री कृष्ण अब राजनीतिज्ञों की तरह बातें और व्यवहार करने लगे हैं।

(B) गोपियां अब फिर से क्या वापस पाना चाहती है?
Ans:
गोपियां अब अपना दिल वापस पाना चाहती है जो कृष्ण चुरा ले गए थे। गोपियां अब योग के माध्यम से अपने दिल को फिर से पुनः प्राप्त करना चाहती हैं।

(C) गोपियों ने राजधर्म के बारे में कौन – सी बात बताती है? स्पष्ट करें।
Ans:
गोपियों ने राजधर्म के बारे में बताते हुए कहा कि जो राजधर्म में रहते हैं वह कभी अपने प्रजा को नहीं सताते हैं। गोपियों ने अप्रत्यक्ष रुप से श्री कृष्ण को व्यंग्य कर रही है कि श्री कृष्ण राजधर्म का पालन नहीं कर पा रहे हैं और हम गोपियों को सता रहे हैं।

(D) गोपियों ने श्री कृष्ण के व्यवहार में कौन – सी राजनीति देखती है वर्णन करें।
Ans:
कृष्ण का व्यवहार गोपियों को छल पूर्ण प्रतीत होता है। गोपियों को लगता है कि श्री कृष्ण उद्धव द्वारा योग संदेश भेजकर हम गोपियों के साथ छल किये। श्रीकृष्ण गोपियों के पास जाकर उनकी विरहा को और नहीं बढ़ाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने उद्धव द्वारा प्रेम – संदेश के बजाय योग – संदेश भेज दिया ताकि गोपियों का मन श्री कृष्ण के प्रति प्रेम से हटकर योग में उनका ध्यान लगा रहे। गोपियों के अनुसार छल करना अपने वादे को पूरा न करना यह सब राजनीति में आता है , जो कि श्रीकृष्ण ने किया।

Read More