हमारा पर्यावरण | Hamara Paryavaran | Class 10 Science Chapter 9

1. Intro: हमारा पर्यावरण

Class 10 Science: प्रिय विद्यार्थियों! JPathshala पर आपका स्वागत है। JAC बोर्ड (झारखण्ड अधिविध परिषद् राँची) द्वारा संचालित पाठ्यक्रम और वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, आज हम कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 9 Hamara Paryavaran (हमारा पर्यावरण) के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों का सटीक एवं सुलभ समाधान पढ़ेंगे।

2. 1 अंक स्तरीय प्रश्न (MCQs)

Q1. विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है?
(a) 5 जुलाई | (b) 5 जून | (c) 15 अगस्त | (d) 2 अक्टूबर
Answer: (b) 5 जून
Q2. पर्यावरण के मुख्य कारक कौन-कौन से हैं?
(a) जैविक कारक | (b) अजैविक कारक | (c) (a) और (b) दोनों | (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) (a) और (b) दोनों
Q3. जैविक कारकों (Biotic Factors) के दो उदाहरण दें।
(a) पौधे और जंतु | (b) प्रकाश और मृदा | (c) जल और वायु | (d) तापमान और वर्षा
Answer: (a) पौधे और जंतु
Q4. किन्हीं दो अजैविक कारकों (Abiotic Factors) के नाम लिखें।
(a) गाय और शेर | (b) कवक और शैवाल | (c) प्रकाश और मृदा | (d) पौधे और जंतु
Answer: (c) प्रकाश और मृदा
Q5. ऐसे कुछ पदार्थों के नाम चुनें जो पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।
(a) शुद्ध जल | (b) ऑक्सीजन | (c) सब्जी के छिलके, पोलीथीन, प्लास्टिक | (d) ओजोन
Answer: (c) सब्जी के छिलके, पोलीथीन, प्लास्टिक
Q6. ऐसे पदार्थों को क्या कहते हैं जो जैविक प्रक्रम (सूक्ष्मजीवों) द्वारा अपघटित हो जाते हैं?
(a) अजैव निम्नीकरणीय | (b) जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) | (c) रेडियोधर्मी | (d) विषैले रसायन
Answer: (b) जैव निम्नीकरणीय
Q7. किसी मानव-निर्मित पारितंत्र (Artificial Ecosystem) का नाम लिखें।
(a) वन | (b) समुद्र | (c) खेत या बगीचा | (d) झील
Answer: (c) खेत या बगीचा
Q8. प्राकृतिक पारितंत्र के उदाहरण कौन-से हैं?
(a) वन | (b) तालाब | (c) समुद्र | (d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
Q9. ऐसे दो पदार्थों के नाम चुनें जिनका जैविक अपघटन नहीं होता (अजैव निम्नीकरणीय)।
(a) कागज और लकड़ी | (b) सब्जी के छिलके और सूती कपड़ा | (c) प्लास्टिक और DDT | (d) पत्तियां और गोबर
Answer: (c) प्लास्टिक और DDT
Q10. पारितंत्र में कौन-से जीव उत्पादक (Producers) कहलाते हैं?
(a) शाकाहारी | (b) हरे पौधे एवं नील-हरित शैवाल | (c) मांसाहारी | (d) अपघटक
Answer: (b) हरे पौधे एवं नील-हरित शैवाल
Q11. जीवों की ऐसी श्रेणी को, जो एक-दूसरे से भोजन ग्रहण करते हैं, क्या कहते हैं?
(a) पोषी स्तर | (b) खाद्य जाल | (c) खाद्य श्रृंखला (Food Chain) | (d) जैव आवर्धन
Answer: (c) खाद्य श्रृंखला (Food Chain)
Q12. खाद्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों को क्या कहते हैं?
(a) उत्पादक | (b) उपभोक्ता | (c) अपघटक | (d) पोषी स्तर (Trophic Level)
Answer: (d) पोषी स्तर
Q13. एक सरल खाद्य श्रृंखला का सही उदाहरण कौन-सा है?
(a) शेर – हिरन – घास | (b) घास – शेर – हिरन | (c) घास – हिरन – शेर | (d) हिरन – शेर – घास
Answer: (c) घास – हिरन – शेर
Q14. किसी भी खाद्य श्रृंखला में प्रथम पोषी स्तर को क्या कहते हैं?
(a) शाकाहारी | (b) मांसाहारी | (c) उत्पादक | (d) सर्वाहारी
Answer: (c) उत्पादक
Q15. नील-हरित शैवाल (Blue-Green Algae) किस पोषी स्तर से संबंधित है?
(a) उत्पादक (प्रथम पोषी स्तर) | (b) प्राथमिक उपभोक्ता | (c) द्वितीयक उपभोक्ता | (d) अपघटक
Answer: (a) उत्पादक
Q16. एक सर्वाहारी (Omnivore) जीव का नाम लिखें।
(a) गाय | (b) शेर | (c) कुत्ता (या मनुष्य) | (d) हिरन
Answer: (c) कुत्ता (या मनुष्य)
Q17. बगीचा तथा खेती किस प्रकार के पारितंत्र हैं?
(a) प्राकृतिक पारितंत्र | (b) मानव-निर्मित (कृत्रिम) पारितंत्र | (c) जलीय पारितंत्र | (d) मरुस्थलीय पारितंत्र
Answer: (b) मानव-निर्मित (कृत्रिम) पारितंत्र
Q18. क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) का उपयोग मुख्यतः किसलिए किया जाता है?
(a) वाहनों के ईंधन में | (b) उर्वरकों में | (c) रेफ्रिजरेशन (AC/Fridge) और अग्निशमन में | (d) कीटनाशक में
Answer: (c) रेफ्रिजरेशन और अग्निशमन में
Q19. ओजोन परत का अवक्षय (Depletion) करने वाले यौगिकों का समूह क्या है?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड | (b) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) | (c) मीथेन | (d) सल्फर डाइऑक्साइड
Answer: (b) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC)
Q20. ओजोन (Ozone) का अणुसूत्र क्या है?
(a) $O_2$ | (b) $H_2O$ | (c) $CO_2$ | (d) $O_3$
Answer: (d) $O_3$

3. लघु उत्तरीय प्रश्न (3 Marks Questions)

Q.1. पर्यावरण (Environment) क्या है?
Ans: किसी भी जीव के चारों तरफ पाए जाने वाले जीव-जंतु, पेड़-पौधे, निर्जीव पदार्थ तथा वस्तुएं और प्राकृतिक परिस्थितियां जैसे सूर्य का प्रकाश, वायु, जल और जलवायु आदि को सम्मिलित रूप से पर्यावरण कहते हैं।
Q.2. ऐसे दो तरीके सुझाएं जिनमें जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
Ans:
(i) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपघटित होते समय दुर्गंध एवं हानिकारक गैसें (जैसे मीथेन) मुक्त करते हैं, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वायु प्रदूषण होता है।
(ii) इन पदार्थों के सड़े-गले ढेरों में बीमारियों के सूक्ष्मजीव, मच्छर और मक्खियां पनपते हैं जो भयानक बीमारियां फैलाते हैं।
Q.3. ऐसे दो तरीके बताएं जिनमें अजैव निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
Ans:
(i) अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ (जैसे प्लास्टिक) सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते, जिसके कारण कचरा प्रबंधन (निष्पादन) की भारी समस्या उत्पन्न होती है और यह परिदृश्य को गंदा करते हैं।
(ii) जब इन पदार्थों को जलाया जाता है, तो अत्यंत हानिकारक और विषैली गैसें निकलती हैं जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक होती हैं। साथ ही, कुछ रसायन (जैसे DDT) आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जैव आवर्धन का कारण बनते हैं।
Q.4. पारितंत्र में अपमार्जकों (Decomposers) की क्या भूमिका है?
Ans: अपमार्जक (जैसे जीवाणु और कवक) पर्यावरण में पदार्थों के चक्रीकरण (Recycling) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मृत जीवों और सड़े-गले पदार्थों को सरल अकार्बनिक तत्वों में तोड़कर वापस मिट्टी में मिला देते हैं। यदि अपमार्जक ना हों, तो पृथ्वी पर अपशिष्टों का ढेर लग जाएगा और पर्यावरण का प्राकृतिक संतुलन स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगा।
Q.5. पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह अचक्रीय (Unidirectional) होता है, कैसे?
Ans: ऊर्जा हमेशा सूर्य से उत्पादकों (हरे पौधों) में प्रवेश करती है, और फिर आहार श्रृंखला के माध्यम से प्राथमिक, द्वितीयक और सर्वोच्च उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। किसी भी स्तर से ऊर्जा वापस लौटकर सूर्य या पिछले स्तर को नहीं मिलती। सर्वोच्च उपभोक्ता की मृत्यु और अपघटन के समय यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में मुक्त होकर वातावरण में चली जाती है, लेकिन वापस सूर्य के पास नहीं जाती। इसलिए ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (अचक्रीय) होता है।
Q.6. जैव-भू-रसायन चक्र (Biogeochemical Cycle) क्या है? कोई दो उपयुक्त उदाहरण दें।
Ans: भूमि और वायुमंडल में पाए जाने वाले पोषक तत्व (रसायन) पौधों द्वारा अवशोषित होकर आहार श्रृंखला के माध्यम से जीवों में भ्रमण करते हैं। जीवधारी की मृत्यु के पश्चात अपघटन की प्रक्रिया द्वारा ये रसायन पुनः भूमि या वायुमंडल में लौट आते हैं। पोषक तत्वों के इस चक्रीय प्रवाह को जैव-भू-रसायन चक्र कहते हैं।
उदाहरण: जल चक्र (Water Cycle), नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle), कार्बन चक्र।
Q.7. आहार श्रृंखला (Food Chain) की परिभाषा दें। आहार श्रृंखला के अध्ययन के दो लाभ बताएं।
Ans:
परिभाषा: जब कोई जीव अपने जीवन यापन के लिए दूसरे जीव को खाकर जीवित रहता है, तो जीवों का यह क्रम जिसमें ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, आहार श्रृंखला कहलाता है।
अध्ययन से लाभ:
(i) इससे पारिस्थितिक संतुलन और जीवों के बीच के संबंध का पता चलता है।
(ii) यह समझने में मदद मिलती है कि ऊर्जा और हानिकारक रसायन (जैसे कीटनाशक) एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर तक कैसे पहुँचते हैं।
Q.8. ओजोन अवक्षय (Ozone Depletion) क्या है? ओजोन अवक्षय के हानिकारक प्रभाव क्या होते हैं?
Ans: जब वायुमंडल (समताप मंडल) में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे रसायनों की सांद्रता बढ़ती है, तब वे ओजोन ($O_3$) अणुओं को नष्ट कर देते हैं। इससे ओजोन परत पतली होने लगती है। इस घटना को ओजोन अवक्षय कहते हैं。
हानिकारक प्रभाव:
(i) घातक पराबैंगनी (UV) किरणें पृथ्वी तक पहुँचने लगेंगी।
(ii) मनुष्यों में त्वचा कैंसर और मोतियाबिंद की बीमारी।
(iii) पौधों की पत्तियों का क्षतिग्रस्त होना और फसल उत्पादन में कमी।
Q.9. पराबैंगनी (UV) किरणों के जीवधारियों पर पड़ने वाले किन्हीं दो हानिकारक प्रभावों का उल्लेख करें।
Ans:
(i) मनुष्यों की आँखों में मोतियाबिंद (Cataract) का होना।
(ii) त्वचा का कैंसर (Skin Cancer) होना और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का कमज़ोर होना।
Q.10. जैविक आवर्धन (Biological Magnification) क्या है? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा?
Ans: जैव अनिम्नीकरणीय रासायनिक पदार्थ (जैसे कीटनाशक – DDT) मिट्टी या जल से आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं। क्योंकि ये रसायन अपघटित नहीं होते, इसलिए ये प्रत्येक पोषी स्तर पर जीवों के शरीर (वसा) में उत्तरोत्तर अधिक सांद्रता में संचित होते जाते हैं। इसे जैविक आवर्धन कहते हैं。
हाँ, पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर यह आवर्धन भिन्न-भिन्न होगा। उत्पादकों में इसकी मात्रा सबसे कम होगी, जबकि आहार श्रृंखला के सर्वोच्च स्तर (जैसे मनुष्य या बाज़) पर जैव आवर्धन सर्वाधिक होगा

4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks Questions)

Q.1. किसी आहार-श्रृंखला में ऊर्जा की हानि कैसे होती है? (लिंडमैन का 10% का नियम)
Ans: किसी भी आहार श्रृंखला में एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर में केवल 10% ऊर्जा का ही स्थानांतरण होता है, और 90% ऊर्जा बेकार चली जाती है (या ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है)। ऊर्जा के इस प्रवाह को संक्षेप में इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

(i) पृथ्वी पर सूर्य से जो विकिरण ऊर्जा आती है, हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण में उसका केवल 1% भाग ही खाद्य ऊर्जा में बदल पाते हैं। यदि सूर्य से $1000\text{ J}$ ऊर्जा मिलती है, तो पौधे केवल $10\text{ J}$ संचित करते हैं।
(ii) पौधों (उत्पादकों) द्वारा संचित की गई ऊर्जा जब प्राथमिक उपभोक्ताओं (शाकाहारी) में पहुँचती है, तो वे इसका 90% भाग अपनी श्वसन, पाचन और वृद्धि जैसी उपापचयी क्रियाओं में खर्च कर देते हैं। केवल 10% उनके शरीर के मांस के रूप में संचित होता है।
(iii) इसी प्रकार, प्राथमिक उपभोक्ताओं से द्वितीयक उपभोक्ताओं (मांसाहारियों) में भी केवल 10% ऊर्जा ही पहुँचती है। इस प्रकार सभी जीवधारी ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में वायुमंडल में विमोचित करते हैं जिसे सामुदायिक ऊष्मा कहा जाता है।
(iv) जीव-जंतुओं की मृत्यु के बाद उनके शरीरों के अपघटन से शेष ऊर्जा वातावरण में चली जाती है। ऊर्जा के लगातार ह्रास के कारण ही आहार श्रृंखला में 3 या 4 से अधिक पोषी स्तर नहीं होते।
सूर्य की ऊर्जा (100,000 J) उत्पादक (हरे पौधे) – 1000 J प्राथमिक उपभोक्ता – 100 J द्वितीयक – 10 J सर्वोच्च – 1 J 10% 10% 10% ऊष्मा के रूप में 90% ऊर्जा का ह्रास

(चित्र: ऊर्जा प्रवाह का 10% नियम / पोषी स्तर का पिरामिड)

Q.2. ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?
Ans: ओजोन: ओजोन ऑक्सीजन का ही एक समस्थानिक रूप है। इसका एक अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बना होता है। इसका अणुसूत्र $O_3$ है।

ओजोन का निर्माण:
वायुमंडल के ऊपरी भाग (समताप मंडल) में सूर्य की शक्तिशाली पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रभाव से ऑक्सीजन ($O_2$) अणु टूटकर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणुओं ($O$) में बदल जाते हैं। यह स्वतंत्र परमाणु ऑक्सीजन ($O_2$) अणु से संयुक्त होकर ओजोन ($O_3$) बनाता है।
$$ O_2 \xrightarrow{\text{पराबैंगनी किरणें}} O + O \quad \text{(परमाणुवीय ऑक्सीजन)} $$ $$ O + O_2 \rightarrow O_3 \quad \text{(ओजोन)} $$

पारितंत्र पर प्रभाव (सुरक्षा छतरी):
ओजोन परत सूर्य से पृथ्वी तक आने वाले घातक पराबैंगनी विकिरणों (UV rays) को सोख लेती है तथा उन्हें पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती है। इस प्रकार यह पृथ्वी के पारितंत्रों और जीवों के लिए एक सुरक्षा छतरी (Protective Shield) का कार्य करती है। पराबैंगनी विकिरण जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। इससे मनुष्यों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद आदि भयानक बीमारियां होती हैं, और यह पौधों की पत्तियों को क्षतिग्रस्त कर प्रकाश-संश्लेषण दर को घटा देता है।
पृथ्वी (Earth) ओजोन परत (O₃ Shield) सूर्य UV किरणें (रोकी गईं) ओजोन छिद्र हानिकारक प्रभाव

(चित्र: पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत का सुरक्षा कवच एवं ओजोन छिद्र का प्रभाव)

Q.3. ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
Ans: ओजोन परत की क्षति हमारे लिए अत्यंत चिंता का विषय है क्योंकि ओजोन छिद्र के कारण अधिक से अधिक पराबैंगनी (UV) विकिरणें पृथ्वी पर आएँगी, जो हमारे लिए निम्न प्रकार से हानिकारक प्रभाव डालती हैं:
(i) मनुष्यों में त्वचा के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है और प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर हो जाता है।
(ii) पौधों में वृद्धि दर कम हो जाती है और फसलें नष्ट होती हैं।
(iii) समुद्री खाद्य श्रृंखला नष्ट हो सकती है क्योंकि यह समुद्र के सतह पर तैरने वाले फाइटोप्लैंकटन (Phytoplankton) को मार देती है।
(iv) यह वायुमंडल के तापमान और जलवायु संतुलन को बिगाड़ देती है।

ओजोन परत की क्षति को कम करने के लिए उठाए गए कदम:
(i) 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने एक वैश्विक समझौता किया (मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल) जिसमें यह सहमति बनी कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के उत्पादन और उपयोग को पूरी तरह रोका जाए।
(ii) अब दुनिया भर में सभी रेफ्रिजरेटर और AC कंपनियों के लिए CFC-मुक्त उपकरण बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
(iii) एरोसोल स्प्रे (Aerosol Sprays) और फोम बनाने में हानिकारक गैसों का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया गया है।
Q.4. पीड़कनाशी (Pesticides) रसायनों का अत्यधिक प्रयोग किस प्रकार जैव आवर्धन (Biomagnification) की समस्या को उत्पन्न कर रहा है?
Ans: फसलों को बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए किसान खेतों में पीड़कनाशी रसायनों (जैसे DDT) का अत्यधिक छिड़काव करते हैं।
ये रसायन खेतों की मिट्टी में मिल जाते हैं और वर्षा काल में अथवा सिंचाई के पानी के साथ बहकर तालाबों या नदियों (जल स्रोतों) में चले जाते हैं।
मिट्टी से इन विषैले पदार्थों का पौधों द्वारा जल एवं खनिजों के साथ अवशोषण हो जाता है, और जलाशयों से ये रसायन जलीय पौधों (शैवाल) एवं मछलियों में प्रवेश कर जाते हैं। चूँकि ये रसायन अजैव निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) होते हैं, इसलिए ये जीवों के शरीर से बाहर नहीं निकलते और आहार श्रृंखला के प्रत्येक स्तर पर इनकी मात्रा बढ़ती जाती है।

चूँकि किसी भी आहार श्रृंखला में मनुष्य शीर्षस्थ (सर्वोच्च उपभोक्ता) है, अतः हमारे शरीर में ये रासायनिक पदार्थ सर्वाधिक मात्रा में संचित हो जाते हैं। इसी घटना को जैव आवर्धन (Biological Magnification) कहते हैं। DDT तथा अन्य पीड़कनाशी रसायनों के जैव आवर्धित होने के कारण मानव के वृक्क (Kidney), मस्तिष्क एवं परिसंचरण तंत्र में अनेक प्रकार के भयानक विकार और बीमारियां (कैंसर आदि) उत्पन्न होती हैं।