ऑस्कर अवार्ड्स का इतिहास: शुरुआत कब, कैसे और क्यों हुई? (History of Oscar Awards in Hindi)

ऑस्कर अवार्ड्स का इतिहास: शुरुआत कब, कैसे और क्यों हुई? (History of Oscar Awards in Hindi)

सिनेमा जगत में यूं तो हर साल कई अवॉर्ड शो होते हैं, लेकिन जब बात ‘ऑस्कर अवार्ड्स’ (Oscar Awards) की आती है, तो इसकी चमक और अहमियत दुनिया में सबसे ज्यादा मानी जाती है। हाल ही में 98वें अकैडमी अवॉर्ड्स (Oscars 2026) की धूम पूरी दुनिया में रही। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार की शुरुआत कब हुई? इसे ‘ऑस्कर’ ही क्यों कहा जाता है?

आज Jpathshala के इस लेख में हम सिनेमा और इतिहास के पन्नों को पलटेंगे और जानेंगे ऑस्कर अवार्ड्स का पूरा ऐतिहासिक सफर, जो हर छात्र और सामान्य ज्ञान (GK) की तैयारी कर रहे उम्मीदवार के लिए जानना बहुत ज़रूरी है।

ऑस्कर अवार्ड्स की शुरुआत कब और कैसे हुई?

ऑस्कर अवार्ड्स का असली नाम ‘अकैडमी अवार्ड्स’ (Academy Awards) है। इसे ‘अकैडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ (AMPAS) द्वारा दिया जाता है।

  • पहली बार कब दिया गया? ऑस्कर पुरस्कार पहली बार 16 मई 1929 को हॉलीवुड के रूजवेल्ट होटल में दिए गए थे।
  • पहला समारोह कैसा था? आज की तरह यह कोई बहुत बड़ा इवेंट नहीं था। इस समारोह में केवल 270 लोग शामिल हुए थे और यह सिर्फ 15 मिनट तक चला था। दिलचस्प बात यह है कि विजेताओं के नामों की घोषणा तीन महीने पहले ही कर दी गई थी।
  • शुरुआत क्यों हुई? इस अवॉर्ड को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य फिल्म इंडस्ट्री के लोगों (एक्टर, डायरेक्टर, राइटर आदि) के बेहतरीन काम को सम्मानित करना और सिनेमा की कला को बढ़ावा देना था।

इसका नाम ‘ऑस्कर’ (Oscar) कैसे पड़ा?

यह इतिहास का एक बहुत ही रोचक सवाल है। जैसा कि हमने बताया, इस अवॉर्ड का आधिकारिक नाम ‘अकैडमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट’ है, तो फिर इसे ऑस्कर क्यों कहते हैं?

इसके पीछे एक बहुत ही मशहूर और दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि 1931 में अकैडमी की लाइब्रेरी चलाने वाली (Librarian) मार्गरेट हेरिक (Margaret Herrick) ने जब पहली बार इस चमचमाती सुनहरी ट्रॉफी को देखा, तो उनके मुंह से अचानक निकला— “अरे! यह तो बिल्कुल मेरे अंकल ऑस्कर (Uncle Oscar) जैसा दिखता है!”

बस यहीं से अकैडमी के सदस्यों के बीच यह नाम मज़ाक-मज़ाक में मशहूर हो गया। 1939 में अकैडमी ने आधिकारिक तौर पर इस ट्रॉफी के लिए ‘ऑस्कर’ नाम को अपना लिया।

ऑस्कर ट्रॉफी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य (GK Highlights)

प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए ऑस्कर ट्रॉफी से जुड़ी ये बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं:

  • डिज़ाइन: इस ट्रॉफी को एमजीएम (MGM) स्टूडियो के आर्ट डायरेक्टर ‘सेड्रिक गिबन्स’ ने डिज़ाइन किया था।
  • दिखने में कैसी है? इस ट्रॉफी में एक योद्धा (Knight) को एक तलवार के साथ फिल्म रील पर खड़ा हुआ दिखाया गया है। फिल्म की रील में 5 तीलियां (Spokes) हैं, जो अकैडमी की पांच मूल शाखाओं— एक्टर्स, डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स, टेक्नीशियंस और राइटर्स को दर्शाती हैं।
  • वजन और धातु: एक ऑस्कर ट्रॉफी का वजन लगभग 3.85 किलोग्राम (8.5 पाउंड) होता है। यह ठोस कांसे (Bronze) की बनी होती है और इस पर 24-कैरेट सोने की परत (Gold Plating) चढ़ी होती है।
  • क्या इसे बेचा जा सकता है? नहीं! अकैडमी के नियमों के अनुसार, कोई भी विजेता अपनी ट्रॉफी को बेच नहीं सकता। अगर वह इसे बेचना चाहता है, तो उसे सबसे पहले इसे अकैडमी को वापस केवल 1 डॉलर में बेचना होगा।

भारत और ऑस्कर (India at Oscars)

भारतीय छात्रों के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि भारत का ऑस्कर में सफर कैसा रहा है:

  1. भानु अथैया (Bhanu Athaiya): ऑस्कर जीतने वाली पहली भारतीय थीं। उन्हें 1983 में आई फिल्म ‘गांधी’ के लिए ‘बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइन’ का अवॉर्ड मिला था।
  2. सत्यजीत रे (Satyajit Ray): 1992 में इस महान भारतीय फिल्म निर्माता को सिनेमा में उनके आजीवन योगदान के लिए ‘ऑनरेरी ऑस्कर’ (Honorary Oscar) से सम्मानित किया गया था।
  3. ए.आर. रहमान और गुलज़ार: 2009 की फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के गाने ‘जय हो’ के लिए इन्होंने ऑस्कर जीता।
  4. हालिया जीत: 2023 में भारतीय फिल्म RRR के गाने ‘Naatu Naatu’ ने बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग और ‘The Elephant Whisperers’ ने बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म का ऑस्कर जीतकर इतिहास रचा था।

निष्कर्ष

1929 के एक छोटे से डिनर इवेंट से शुरू होकर, ऑस्कर आज दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म पुरस्कार बन चुका है। यह सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि सिनेमा के इतिहास और उसके विकास का एक सुनहरा प्रतीक है। इतिहास के छात्रों के लिए सिनेमा के इस सफर को समझना कला और समाज के बदलाव को समझने जैसा है।

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