गुप्त काल में झारखण्ड (Gupta Period)
गुप्त काल (जिसे भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है) के दौरान झारखण्ड क्षेत्र पर गुप्त सम्राटों का सीधा प्रभाव था। इस काल के सबसे प्रतापी शासक समुद्रगुप्त ने इस क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया था:
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समुद्रगुप्त और प्रयाग प्रशस्ति: समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित ‘प्रयाग प्रशस्ति’ में समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन है। इसमें झारखण्ड क्षेत्र को मुरुंड देश कहा गया है।
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समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान के दौरान झारखण्ड के जंगलों (आटविक राज्यों) से होकर ही अपनी सेना दक्षिण भारत ले गया था।
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चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) और फाह्यान: चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान (Fa-Hien) भारत आया था। फाह्यान ने अपने यात्रा वृतांत में छोटानागपुर क्षेत्र के लिए कुक्कुटलाड शब्द का प्रयोग किया है।
गुप्तकालीन पुरातात्विक साक्ष्य
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महुदी पहाड़ (हजारीबाग): यहाँ से गुप्तकालीन पत्थरों को काटकर बनाए गए मंदिरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
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सतगावाँ (कोडरमा): कोडरमा के सतगावाँ क्षेत्र में दर्जनों गुप्तकालीन मंदिरों के अवशेष मिले हैं, जो उस समय यहाँ हिन्दू धर्म के व्यापक प्रचार-प्रसार को दर्शाते हैं।
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पिठौरिया (राँची): राँची के पिठौरिया नामक स्थान से एक पहाड़ी पर गुप्तकालीन कुआँ (Well) का साक्ष्य मिला है।
गुप्तोत्तर काल: गौड़ शासक शशांक (Shashanka)
गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद झारखण्ड के इतिहास में बंगाल के गौड़ शासक ‘शशांक’ का नाम सबसे महत्वपूर्ण है। झारखण्ड के इतिहास में शशांक का शासनकाल एक निर्णायक मोड़ था:
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पहला ऐतिहासिक शासक: शशांक प्राचीन काल का प्रथम ऐसा शासक था जिसकी राजधानी (कर्णसुवर्ण और संथाल परगना) का बड़ा हिस्सा झारखण्ड क्षेत्र में पड़ता था। उसका साम्राज्य पूरे झारखण्ड, उड़ीसा और बंगाल तक फैला हुआ था।
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शैव धर्म का कट्टर अनुयायी: शशांक हिन्दू धर्म के ‘शैव संप्रदाय’ (भगवान शिव का उपासक) का कट्टर अनुयायी था। उसने झारखण्ड में शिव धर्म को राजकीय संरक्षण प्रदान किया।
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बौद्ध धर्म का विनाशक: शशांक बौद्ध धर्म का घोर विरोधी था। उसने झारखण्ड और आस-पास के क्षेत्रों में स्थित सभी बौद्ध मठों और जैन मंदिरों को नष्ट करवा दिया और उनकी जगह हिन्दू (शिव) मंदिरों का निर्माण करवाया।
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बेनीसागर का शिव मंदिर: शशांक ने पश्चिमी सिंहभूम (कोचांग) और मयूरभंज की सीमा पर स्थित ‘बेनीसागर’ में एक विशाल शिव मंदिर का निर्माण करवाया था, जो आज भी एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।
हर्षवर्धन और ह्वेनसांग
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वर्धन वंश के सबसे प्रतापी राजा हर्षवर्धन के साम्राज्य में झारखण्ड का कांकजोल (राजमहल) का क्षेत्र शामिल था।
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प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) ने इसी कांकजोल (राजमहल) क्षेत्र में सम्राट हर्षवर्धन से पहली बार मुलाकात की थी।
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ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में राजमहल के इस क्षेत्र को ‘की-लो-ना-सू-फा-ला-ना’ (कर्णसुवर्ण) कहकर पुकारा है।
परीक्षा उपयोगी वन-लाइनर (One-Liners)
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झारखण्ड में बौद्ध धर्म के पतन और हिन्दू धर्म (शैव संप्रदाय) के उत्थान का मुख्य श्रेय गौड़ शासक शशांक को जाता है।
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समुद्रगुप्त के ‘प्रयाग प्रशस्ति’ के रचयिता हरिषेण थे, जिन्होंने झारखण्ड को मुरुंड देश कहा।
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चीनी यात्री फाह्यान ने झारखण्ड क्षेत्र के लिए कुक्कुटलाड शब्द का प्रयोग किया था।
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बेनीसागर का शिव मंदिर पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित है, जिसका निर्माण शशांक ने करवाया था।
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