Bharat Mein Rashtrawaad: Class 10 History VVI Questions
क्या आप कक्षा 10 इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय ‘Bharat Mein Rashtrawaad’ (भारत में राष्ट्रवाद) की बेहतरीन तैयारी करना चाहते हैं? ब्रिटिश शासन के खिलाफ पूरे देश का एकजुट होना और स्वतंत्रता संग्राम की कहानी बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक है।
इस खास लेख में, हम आपके लिए बोर्ड परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले Bharat Mein Rashtrawaad चैप्टर से जुड़े सभी अति-महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), अति लघु और लघु उत्तरीय प्रश्नों का एक शानदार संग्रह लेकर आए हैं। परीक्षा में 100% सफलता के लिए इन प्रश्नों का अभ्यास जरूर करें!
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब लौटे?
2. जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था?
3. ‘हिंद स्वराज’ नामक पुस्तक की रचना किसने की थी?
4. असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) कब शुरू हुआ?
5. किस घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था?
6. ‘साइमन कमीशन’ भारत कब पहुँचा?
7. ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग कांग्रेस के किस अधिवेशन में की गई थी?
8. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत किस घटना से हुई?
9. ‘गांधी-इरविन समझौता’ कब हुआ था?
10. “करो या मरो” (Do or Die) का नारा किसने दिया था?
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
बहिष्कार आंदोलन का अर्थ क्या है?
रिपोर्ट क्या है? (नेहरू रिपोर्ट)
स्वराज से क्या तात्पर्य है?
चोरा चोरी कांड क्या है?
गांधी इरविन समझौता की दो प्रमुख विशेषताएं लिखिए।
- सरकार सभी कैदियों को छोड़ने के लिए तैयार हो गई जिनके विरुद्ध हिंसा से जुड़ा कोई मामला नहीं था।
- गांधीजी को प्रतिनिधि के रूप में भेजा गया।
लघु उत्तरीय प्रश्न
सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?
उत्तर: सत्याग्रह के विचार में सत्य की शक्ति का आग्रह और सत्य की खोज पर गांधी जी ने जोर दिया था। सत्याग्रह के विचार के अर्थ की व्याख्या निम्नांकित रूप से की जा सकती है:
- यदि आपका उद्देश्य सच्चा और न्याय पूर्ण है तो आपको अंत में सफलता अवश्य मिलेगी, ऐसा महात्मा गांधी का विचार था।
- प्रतिशोध की भावना या आक्रामकता का सहारा लिए बिना सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे भी अपने संघर्ष में सफल हो सकता है। इस संघर्ष में अंततः सत्य की ही जीत होती है।
- गांधी जी को विश्वास था कि अहिंसा का यह धर्म सभी भारतीयों को एकता के सूत्र में बांध सकता है।
साइमन कमीशन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर: ब्रिटेन की टोरी सरकार ने भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन के जवाब में 1927 में एक वैधानिक आयोग का गठन किया जिसे साइमन कमीशन के नाम से जाना जाता है। इस कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे।
इस आयोग के सभी सदस्य अंग्रेज थे। उनका कार्य यही था कि भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली का अध्ययन करना एवं तदनुरूप सुझाव देना। भारत में इसका विरोध किया गया क्योंकि इस आयोग में एक भी भारतीय सदस्य नहीं थे।
अतः 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया तो उसका स्वागत ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारों से किया गया। कांग्रेस और मुस्लिम लीग सभी पार्टियों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। पंजाब में लाला लाजपत राय ने इस आयोग के विरुद्ध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, पुलिस ने उन पर इतनी लाठियां बरसाईं की इस प्रहार में उनकी मृत्यु हो गई।
1920 के असहयोग आंदोलन के परिणाम लिखे।
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा असहयोग आंदोलन सन 1920 में प्रारंभ होकर 1922 तक चला। इसके प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- इस आंदोलन से जनता में नया उत्साह उत्पन्न हो गया।
- हिंदू-मुस्लिम मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने लगे।
- लोगों ने सरकारी नौकरियां छोड़ दीं।
- विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया।
स्वराज दल का गठन क्यों किया गया? इसका क्या कार्य था?
उत्तर: स्वराज दल का गठन 1923 में कांग्रेस के स्पेशल अधिवेशन (दिल्ली) में अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में हुआ।
कांग्रेस ने स्वराज्यवादियों को अनुमति दे दी कि वे चुनाव में भाग ले सकते हैं। उन्होंने केंद्रीय और प्रांतीय धारा सभाओं में बहुमत सीटें पाईं। इससे अंग्रेजों को परेशानी हुई कि वे अपनी नीतियों और प्रस्तावों को आसानी से पास ना करवा पाएंगे। स्वराज्यवादियो ने अंग्रेज विरोधी भावना बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दांडी यात्रा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर: अंग्रेजों के नमक कानून के खिलाफ गांधी जी ने दांडी यात्रा प्रारंभ की जिसका उद्देश्य नमक कानून का उल्लंघन करना था। स्वतंत्रता के लिए देश को एकजुट करने के लिए गांधी जी ने नमक को एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखा।
नमक सर्वसाधारण के भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा था तथा चिकित्सकीय दृष्टिकोण से भी यह अत्यंत आवश्यक था। अतः नमक कर को गांधी जी ने ब्रिटिश शासन का सबसे दमनकारी पहलू बताया।
इस आंदोलन के अंतर्गत गांधी जी ने अपने गिने-चुने साथियों के साथ साबरमती आश्रम से 240 किलोमीटर दूर डांडी नामक तटीय कस्बे तक की पैदल यात्रा की। दांडी मार्च एक अभूतपूर्व घटना हुई, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया। दांडी यात्रा द्वारा ही गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।
