1. Intro: जीव जनन कैसे करते हैं
Class 10 Science Chapter 7: प्रिय विद्यार्थियों! JPathshala पर आपका स्वागत है। JAC बोर्ड (झारखण्ड अधिविध परिषद् राँची) द्वारा संचालित पाठ्यक्रम और वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, आज हम कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 7 Jiv Janan Kaise Karte Hain (जीव जनन कैसे करते हैं) के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों का सटीक एवं सुलभ समाधान पढ़ेंगे।
2. 1 अंक स्तरीय प्रश्न (MCQs)
Q1. जनन (Reproduction) की मूल घटना क्या है?
Answer: (b) डी० एन० ए० की प्रतिकृति बनना।
Q2. कोशिका में डी० एन० ए० (DNA) कहाँ पाया जाता है?
Answer: (c) कोशिका के केन्द्रक में।
Q3. डी० एन० ए० (DNA) का प्रमुख कार्य क्या है?
Answer: (b) प्रोटीन बनाने के स्रोत के रूप में कार्य करना।
Q4. एक ऐसे जीवधारी का नाम लिखें जिसमें द्विविभाजन (Binary Fission) की क्रिया द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
Answer: (c) अमीबा।
Q5. यीस्ट (Yeast) कोशिका किस विधि द्वारा अलैंगिक जनन करती है?
Answer: (a) मुकुलन।
Q6. स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) में जनन (प्रजनन) किस विधि से होता है?
Answer: (b) खंडन विधि।
Q7. हाइड्रा (Hydra) में प्रजनन मुख्यतः किस विधि से होता है?
Answer: (b) मुकुलन। (नोट: हाइड्रा में पुनरुद्भवन भी होता है)
Q8. बहुविखंडन (Multiple Fission) द्वारा प्रजनन करने वाले एक जीव का नाम लिखें।
Answer: (c) प्लाज्मोडियम।
Q9. मुकुल (Bud) से नये जीव का विकसित होना मुकुलन कहलाता है। ऐसे दो जंतुओं के नाम चुनें जो मुकुलन द्वारा नये जीवों को उत्पन्न करते हैं।
Answer: (b) हाइड्रा और यीस्ट।
Q10. ऐसे जीव को क्या कहते हैं जिसके शरीर में नर और मादा दोनों प्रकार के प्रजनन अंग होते हैं?
Answer: (b) द्विलिंगी या हरमाफ्रोडाइट।
Q11. दो ऐसे जंतुओं के नाम चुनें जिनमें पुनरुद्भवन (Regeneration) द्वारा भी नये जंतु का उद्भव होता है।
Answer: (a) प्लैनेरिया और हाइड्रा।
Q12. एक ऐसे जीवधारी का नाम लिखें जिसमें बीजाणुजनन (Spore Formation) की क्रिया द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
Answer: (b) म्यूकर (तथा राइजोपस)।
Q13. एक ऐसे पौधे का नाम चुनें जिसमें जड़ (Root) द्वारा कायिक प्रवर्धन होता है?
Answer: (c) शकरकंद / सागौन (डहेलिया भी)।
Q14. एक ऐसे पौधे का नाम लिखें जिसमें पत्ती (Leaf) द्वारा वर्धी प्रजनन (कायिक प्रवर्धन) होता है।
Answer: (a) ब्रायोफिलम।
Q15. जनन की किस विधि द्वारा समान गुणों (पैतृक गुणों) वाले जीवों की विशाल आबादी को कायम रखा जा सकता है?
Answer: (b) कायिक प्रवर्धन।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
Q.1. जनन क्या है?
Ans: किसी जीव द्वारा अपनी प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए, अपने जैसी संतान उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया को जनन (Reproduction) कहते हैं।
Q.2. डी० एन० ए० (DNA) प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्व है?
Ans: प्रजनन में DNA प्रतिकृति के निम्नलिखित महत्व हैं:
(i) डी० एन० ए० प्रतिकृति बनने से संतति में विभिन्नताएं (Variations) उत्पन्न होती हैं। ये विभिन्नताएं जैव-विकास (Evolution) का आधार हैं और जीवों को बदलती परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करती हैं।
(ii) डी० एन० ए० प्रतिकृति बनने से कोशिका विभाजन होता है, जो प्रजनन और वृद्धि के लिए अनिवार्य है।
(i) डी० एन० ए० प्रतिकृति बनने से संतति में विभिन्नताएं (Variations) उत्पन्न होती हैं। ये विभिन्नताएं जैव-विकास (Evolution) का आधार हैं और जीवों को बदलती परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करती हैं।
(ii) डी० एन० ए० प्रतिकृति बनने से कोशिका विभाजन होता है, जो प्रजनन और वृद्धि के लिए अनिवार्य है।
Q.3. प्लैनेरिया में पुनरुद्भवन (Regeneration) का वर्णन करें।
Ans: प्लैनेरिया एक चपटा कृमि है जो नम भूमि, तालाब तथा नदी के जल में पाया जाता है। यदि किसी कारणवश प्लैनेरिया का शरीर कई टुकड़ों में कट जाता है, तो इसके शरीर का प्रत्येक टुकड़ा वृद्धि करके एक पूर्ण विकसित नए प्लैनेरिया में बदल जाता है। जीवों में अपने कटे हुए भागों से नए जीव का निर्माण करने की इस क्षमता को पुनरुद्भवन कहते हैं।
Q.4. कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) का उपयोग क्यों किया जाता है?
Ans: कुछ पौधों में कायिक प्रवर्धन विधि का उपयोग निम्न कारणों से किया जाता है:
(i) जिन पौधों (जैसे- केला, गुलाब, संतरा, चमेली) ने बीज उत्पन्न करने की क्षमता खो दी है, उन्हें उगाने का यह एकमात्र तरीका है।
(ii) कायिक प्रवर्धन द्वारा उगाए गए पौधों में बीज द्वारा उगाए गए पौधों की तुलना में फूल और फल शीघ्र आते हैं।
(iii) इस विधि से उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से अपने जनक (पैतृक) पौधे के बिल्कुल समान होते हैं, जिससे उनके अच्छे गुणों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
(i) जिन पौधों (जैसे- केला, गुलाब, संतरा, चमेली) ने बीज उत्पन्न करने की क्षमता खो दी है, उन्हें उगाने का यह एकमात्र तरीका है।
(ii) कायिक प्रवर्धन द्वारा उगाए गए पौधों में बीज द्वारा उगाए गए पौधों की तुलना में फूल और फल शीघ्र आते हैं।
(iii) इस विधि से उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से अपने जनक (पैतृक) पौधे के बिल्कुल समान होते हैं, जिससे उनके अच्छे गुणों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
Q.5. परागण क्या है? परागण के प्रकारों का उल्लेख करें।
Ans: पुष्प के परागकोष (Anther) से परागकणों (Pollen Grains) का वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं। परागकणों का स्थानांतरण वायु, जल, कीट या जंतुओं द्वारा होता है।
परागण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
(i) स्व-परागण (Self-Pollination): जब एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर, या उसी पौधे के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे स्व-परागण कहते हैं。
(ii) पर-परागण (Cross-Pollination): जब एक पौधे के पुष्प के परागकण उसी जाति के किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इसे पर-परागण कहते हैं।
परागण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
(i) स्व-परागण (Self-Pollination): जब एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर, या उसी पौधे के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे स्व-परागण कहते हैं。
(ii) पर-परागण (Cross-Pollination): जब एक पौधे के पुष्प के परागकण उसी जाति के किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इसे पर-परागण कहते हैं।
Q.6. अंकुरण (Germination) क्या है?
Ans: बीज के भीतर भावी पौधा अथवा भ्रूण (Embryo) होता है। जब बीज को जल, वायु और उचित तापमान जैसी उपयुक्त परिस्थितियाँ मिलती हैं, तो भ्रूण विकसित होकर एक नवोद्भिद (नए छोटे पौधे) में बदल जाता है। इस प्रक्रम को अंकुरण कहते हैं।
Q.7. मानव में वृषण (Testes) के क्या कार्य हैं?
Ans: नर में प्राथमिक जनन अंग एक जोड़ी वृषण होते हैं। ये उदर गुहा के बाहर एक त्वचा की थैली (वृषण कोष – Scrotum) में स्थित होते हैं। वृषण के मुख्य कार्य हैं:
(i) शुक्राणुओं (Sperms) का निर्माण करना। वृषण कोष शरीर के तापमान से 2-3°C कम ताप प्रदान करता है, जो शुक्राणु बनने के लिए आवश्यक है।
(ii) नर जनन हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का स्राव करना, जो लड़कों में यौवनारंभ (Puberty) के लक्षणों को नियंत्रित करता है।
(i) शुक्राणुओं (Sperms) का निर्माण करना। वृषण कोष शरीर के तापमान से 2-3°C कम ताप प्रदान करता है, जो शुक्राणु बनने के लिए आवश्यक है।
(ii) नर जनन हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का स्राव करना, जो लड़कों में यौवनारंभ (Puberty) के लक्षणों को नियंत्रित करता है।
Q.8. एक-कोशिक एवं बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?
Ans: एक-कोशिक जीवों में प्रायः अलैंगिक जनन (जैसे- द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन) होता है तथा एक अकेला जीव संतति उत्पन्न कर सकता है। इस पद्धति में उत्पन्न विभिन्नताओं की संभावना बहुत कम होती है。
जबकि, बहुकोशिक जीवों में जटिल शरीर संरचना के कारण मुख्य रूप से लैंगिक जनन होता है, जिसके लिए नर और मादा दोनों जीवों (या युग्मकों) की आवश्यकता होती है। लैंगिक जनन में डी० एन० ए० का संयोजन होता है, जिससे अधिक विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं जो जैव-विकास में सहायक हैं।
जबकि, बहुकोशिक जीवों में जटिल शरीर संरचना के कारण मुख्य रूप से लैंगिक जनन होता है, जिसके लिए नर और मादा दोनों जीवों (या युग्मकों) की आवश्यकता होती है। लैंगिक जनन में डी० एन० ए० का संयोजन होता है, जिससे अधिक विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं जो जैव-विकास में सहायक हैं।
Q.9. परागण व निषेचन क्रिया एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न है?
Ans: परागण व निषेचन क्रिया में भिन्नता:
| परागण (Pollination) | निषेचन (Fertilization) |
|---|---|
| वह क्रिया जिसमें परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, परागण कहलाती है। | वह क्रिया जिसमें नर युग्मक और मादा युग्मक आपस में मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाते हैं, निषेचन कहलाती है। |
| यह लैंगिक जनन क्रिया का प्रथम चरण है। | यह जनन क्रिया का दूसरा (बाद का) चरण है। |
| परागण क्रिया दो प्रकार की होती है: स्व-परागण तथा पर-परागण। | निषेचन क्रिया भी जंतुओं में दो प्रकार की होती है: बाह्य निषेचन तथा आंतरिक निषेचन। |
| इसके लिए प्रायः बाह्य कारकों (हवा, जल, कीट) की आवश्यकता होती है। | यह पौधों/जीवों के शरीर के भीतर (या बाहर) होने वाली एक कोशिकीय प्रक्रिया है। |
Q.10. रजोदर्शन (Menarche) तथा रजोनिवृत्ति (Menopause) में अंतर बताएं।
Ans: रजोदर्शन तथा रजोनिवृत्ति में अंतर:
| रजोदर्शन (Menarche) | रजोनिवृत्ति (Menopause) |
|---|---|
| स्त्रियों में रजोधर्म (मासिक धर्म) के प्रारंभ होने (शुरुआत) को रजोदर्शन कहते हैं। | स्त्रियों में रजोधर्म (मासिक धर्म) की स्थायी समाप्ति को रजोनिवृत्ति कहते हैं। |
| यह सामान्यतः यौवनारंभ के समय (लगभग 11 से 13 वर्ष की आयु में) प्रारंभ होता है। | यह सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की आयु के आसपास होती है। |
| यह जनन काल की शुरुआत का संकेत है। | यह जनन काल की समाप्ति का संकेत है। |
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
Q.1. जीवों में विभिन्नता स्पीशीज के लिए तो लाभदायक है परंतु व्यष्टि (एकल जीव) के लिए आवश्यक नहीं है, क्यों?
Ans: विभिन्नताएं (Variations) प्रायः जीवों को विपरीत और बदलते पर्यावरण की परिस्थितियों में भी जीवित रहने में सहायक होती हैं। पर्यावरण में होने वाले अचानक और खतरनाक परिवर्तन (जैसे तापमान का बढ़ना, जल स्तर में बदलाव) किसी पूरी आबादी (Species) को ही मिटा सकते हैं। परंतु ऐसी परिस्थिति में भी वे कुछ जीव जिंदा बच जाते हैं जो अपनी पीढ़ी के अन्य जीवों से कुछ भिन्न (विभिन्नता वाले) होते हैं। ये बचे हुए जीव प्रजनन द्वारा पुनः अपनी संख्या बढ़ा लेते हैं और उनकी स्पीशीज नष्ट होने से बच जाती है। इस प्रकार विभिन्नताएं स्पीशीज (प्रजाति) के कायम रहने और उनके अनुरक्षण के लिए लाभदायक होती हैं।
जहाँ व्यष्टि (अकेले जीव) का प्रश्न है, उसके लिए विभिन्नता आवश्यक नहीं है क्योंकि एक अकेला जीव तभी सफलतापूर्वक जीवित रह सकता है जब वह अपने वर्तमान परिवेश से पूर्णतः अनुकूलित हो। पर्यावरण में बदलाव न होने पर अकेले व्यष्टि के लिए अपनी पीढ़ी के अन्य जीवों से भिन्न होना लाभदायक नहीं भी हो सकता है।
जहाँ व्यष्टि (अकेले जीव) का प्रश्न है, उसके लिए विभिन्नता आवश्यक नहीं है क्योंकि एक अकेला जीव तभी सफलतापूर्वक जीवित रह सकता है जब वह अपने वर्तमान परिवेश से पूर्णतः अनुकूलित हो। पर्यावरण में बदलाव न होने पर अकेले व्यष्टि के लिए अपनी पीढ़ी के अन्य जीवों से भिन्न होना लाभदायक नहीं भी हो सकता है।
Q.2. एकल जीवों में जनन की किन्हीं दो विधियों का वर्णन करें।
Ans: एकल जीवों (एक-कोशिकीय या सरल जीवों) में अलैंगिक जनन की दो प्रमुख विधियां निम्नलिखित हैं:
(i) विखंडन या द्विखंडन (Binary Fission):
यह अलैंगिक जनन की वह विधि है जिसमें एक पूर्णतः विकसित मातृ कोशिका (Parent cell) विभाजित होकर दो समान अनुजात (Daughter) कोशिकाओं को जन्म देती है। इसमें सबसे पहले कोशिका का केंद्रक (Nucleus) दो भागों में विभाजित होता है, फिर कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) बँट जाता है और अंततः दो नए जीव बन जाते हैं। अमीबा, पैरामीशियम और लेश्मानिया में इस प्रकार का जनन पाया जाता है।
(ii) खंडन (Fragmentation):
इस प्रकार के जनन में सरल संरचना वाले बहुकोशिक जीवों का शरीर पूर्ण विकसित होने पर या किसी यांत्रिक कारण से दो या दो से अधिक टुकड़ों (खंडों) में टूट जाता है। प्रत्येक खंड वृद्धि करके (अपने खोए हुए भागों का विकास कर) एक पूर्ण विकसित नए जीव में परिवर्तित हो जाता है और स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करता है। स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) में इसी विधि द्वारा जनन होता है।
(i) विखंडन या द्विखंडन (Binary Fission):
यह अलैंगिक जनन की वह विधि है जिसमें एक पूर्णतः विकसित मातृ कोशिका (Parent cell) विभाजित होकर दो समान अनुजात (Daughter) कोशिकाओं को जन्म देती है। इसमें सबसे पहले कोशिका का केंद्रक (Nucleus) दो भागों में विभाजित होता है, फिर कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) बँट जाता है और अंततः दो नए जीव बन जाते हैं। अमीबा, पैरामीशियम और लेश्मानिया में इस प्रकार का जनन पाया जाता है।
(चित्र: अमीबा में द्विखंडन विधि द्वारा जनन)
(ii) खंडन (Fragmentation):
इस प्रकार के जनन में सरल संरचना वाले बहुकोशिक जीवों का शरीर पूर्ण विकसित होने पर या किसी यांत्रिक कारण से दो या दो से अधिक टुकड़ों (खंडों) में टूट जाता है। प्रत्येक खंड वृद्धि करके (अपने खोए हुए भागों का विकास कर) एक पूर्ण विकसित नए जीव में परिवर्तित हो जाता है और स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करता है। स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) में इसी विधि द्वारा जनन होता है।
Q.3. पौधों में लैंगिक जनन की क्रिया-विधि का वर्णन करें।
Ans: पौधों में लैंगिक जनन की क्रिया उनके पुष्पों (Flowers) के माध्यम से होती है। पुष्प में मुख्य जनन अंग होते हैं:
• नर जनन अंग: इसे पुंकेसर (Stamen) कहते हैं। इसके शीर्ष भाग (परागकोश) में पीले रंग के परागकण (Pollen grains) बनते हैं जिनमें नर युग्मक होते हैं。
• मादा जनन अंग: इसे स्त्रीकेसर (Pistil / Carpel) कहते हैं, जो पुष्प के केंद्र में होता है। इसके तीन भाग होते हैं— वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। अंडाशय (Ovary) के भीतर बीजांड होते हैं, जिनमें मादा युग्मक (अंड कोशिका) पाई जाती है。
क्रिया-विधि (Mechanism):
1. परागण: जब परागकण विकसित हो जाते हैं, तब परागकोश के फटने से वे हवा, जल, कीट आदि के माध्यम से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (Stigma) पर पहुँच जाते हैं। इस क्रिया को परागण कहते हैं。
2. पराग नली का विकास: वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद परागकण अंकुरित होते हैं और उनसे एक नली निकलती है जिसे पराग नली कहते हैं। यह नली वर्तिका (Style) से होते हुए नीचे अंडाशय (Ovary) तक पहुँच जाती है。
3. निषेचन (Fertilization): पराग नली के माध्यम से नर युग्मक अंडाशय में पहुँचते हैं। अंडाशय में नर युग्मक और मादा युग्मक आपस में मिल जाते हैं (संलयन होता है)। इसी संलयन को निषेचन कहते हैं, जिसके फलस्वरूप युग्मनज (Zygote) बनता है。
4. बीज व फल का निर्माण: निषेचन के बाद युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है। बीजांड कठोर आवरण में बदलकर बीज (Seed) बन जाता है, और पूरा अंडाशय तेजी से वृद्धि करके फल (Fruit) में बदल जाता है।
• नर जनन अंग: इसे पुंकेसर (Stamen) कहते हैं। इसके शीर्ष भाग (परागकोश) में पीले रंग के परागकण (Pollen grains) बनते हैं जिनमें नर युग्मक होते हैं。
• मादा जनन अंग: इसे स्त्रीकेसर (Pistil / Carpel) कहते हैं, जो पुष्प के केंद्र में होता है। इसके तीन भाग होते हैं— वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। अंडाशय (Ovary) के भीतर बीजांड होते हैं, जिनमें मादा युग्मक (अंड कोशिका) पाई जाती है。
क्रिया-विधि (Mechanism):
1. परागण: जब परागकण विकसित हो जाते हैं, तब परागकोश के फटने से वे हवा, जल, कीट आदि के माध्यम से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (Stigma) पर पहुँच जाते हैं। इस क्रिया को परागण कहते हैं。
2. पराग नली का विकास: वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद परागकण अंकुरित होते हैं और उनसे एक नली निकलती है जिसे पराग नली कहते हैं। यह नली वर्तिका (Style) से होते हुए नीचे अंडाशय (Ovary) तक पहुँच जाती है。
3. निषेचन (Fertilization): पराग नली के माध्यम से नर युग्मक अंडाशय में पहुँचते हैं। अंडाशय में नर युग्मक और मादा युग्मक आपस में मिल जाते हैं (संलयन होता है)। इसी संलयन को निषेचन कहते हैं, जिसके फलस्वरूप युग्मनज (Zygote) बनता है。
4. बीज व फल का निर्माण: निषेचन के बाद युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है। बीजांड कठोर आवरण में बदलकर बीज (Seed) बन जाता है, और पूरा अंडाशय तेजी से वृद्धि करके फल (Fruit) में बदल जाता है।
(चित्र: पुष्प के अनुदैर्ध्य काट (Longitudinal Section) का नामांकित आरेख)
Q.4. गर्भनिरोधन (Contraception) की विभिन्न विधियां कौन-कौन सी हैं?
Ans: अवांछित गर्भधारण को रोकने के लिए गर्भनिरोधन की कई विधियों का विकास किया गया है, जो निम्नलिखित हैं:
(i) यांत्रिक अवरोधिका विधियां (Barrier Methods): इन विधियों में कंडोम (Condom), मध्यपट (Diaphragm) और गर्भाशय ग्रीवा आच्छद (Cervical cap) का उपयोग किया जाता है। ये युक्ति मैथुन के दौरान मादा जननांग में शुक्राणुओं के प्रवेश को भौतिक रूप से रोकती हैं, जिससे शुक्राणु अंडाणु तक नहीं पहुँच पाते।
(ii) रासायनिक विधियां (Chemical Methods): इस प्रकार की विधि में स्त्रियां हार्मोनल गोलियों (Oral pills) का प्रयोग करती हैं। ये गोलियां मुख्यत: हार्मोन्स के संतुलन को बदल देती हैं, जिससे अंडाशय से अंडाणु का उत्सर्जन (Ovulation) नहीं हो पाता है।
(iii) अंतः गर्भाशयी युक्तियां (IUDs): डॉक्टर द्वारा स्त्रियों के गर्भाशय में कॉपर-टी (Copper-T) या लूप जैसी युक्तियां स्थापित की जाती हैं, जो गर्भधारण को रोकती हैं।
(iv) शल्य (सर्जिकल) विधियां: यह स्थायी विधि है। इसमें पुरुष की शुक्रवाहिका (Vas deferens) को अवरुद्ध कर दिया जाता है, जिसे नर नसबंदी (Vasectomy) कहते हैं। इसी प्रकार, स्त्री की डिंबवाहिनी (Fallopian tube) के छोटे से भाग को शल्यक्रिया द्वारा काटकर बांध दिया जाता है, जिसे स्त्री नसबंदी (Tubectomy) कहते हैं।
(i) यांत्रिक अवरोधिका विधियां (Barrier Methods): इन विधियों में कंडोम (Condom), मध्यपट (Diaphragm) और गर्भाशय ग्रीवा आच्छद (Cervical cap) का उपयोग किया जाता है। ये युक्ति मैथुन के दौरान मादा जननांग में शुक्राणुओं के प्रवेश को भौतिक रूप से रोकती हैं, जिससे शुक्राणु अंडाणु तक नहीं पहुँच पाते।
(ii) रासायनिक विधियां (Chemical Methods): इस प्रकार की विधि में स्त्रियां हार्मोनल गोलियों (Oral pills) का प्रयोग करती हैं। ये गोलियां मुख्यत: हार्मोन्स के संतुलन को बदल देती हैं, जिससे अंडाशय से अंडाणु का उत्सर्जन (Ovulation) नहीं हो पाता है।
(iii) अंतः गर्भाशयी युक्तियां (IUDs): डॉक्टर द्वारा स्त्रियों के गर्भाशय में कॉपर-टी (Copper-T) या लूप जैसी युक्तियां स्थापित की जाती हैं, जो गर्भधारण को रोकती हैं।
(iv) शल्य (सर्जिकल) विधियां: यह स्थायी विधि है। इसमें पुरुष की शुक्रवाहिका (Vas deferens) को अवरुद्ध कर दिया जाता है, जिसे नर नसबंदी (Vasectomy) कहते हैं। इसी प्रकार, स्त्री की डिंबवाहिनी (Fallopian tube) के छोटे से भाग को शल्यक्रिया द्वारा काटकर बांध दिया जाता है, जिसे स्त्री नसबंदी (Tubectomy) कहते हैं।