विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव: Vidyut Dhara ka Chumbakiy Prabhav | Class 10 Science Chapter 13 Download PDF Notes

1. Intro: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

Class 10 Science Chapter: प्रिय विद्यार्थियों! JPathshala पर आपका स्वागत है। JAC बोर्ड (झारखण्ड अधिविध परिषद् राँची) द्वारा संचालित पाठ्यक्रम और वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, आज हम कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय Vidyut Dhara ka Chumbakiy Prabhav (विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव) के अति महत्वपूर्ण प्रश्नों का समाधान पढ़ेंगे।

2. 1 अंक स्तरीय प्रश्न (MCQs)

Q1. विद्युत चुंबक (Electromagnet) का उपयोग निम्नलिखित में से किसमें किया जाता है?
(a) विद्युत घंटी में | (b) टेलीफोन रिसीवर में | (c) (a) और (b) दोनों | (d) साधारण बल्ब में
Answer: (c) (a) और (b) दोनों
Q2. स्थायी चुंबक (Permanent Magnet) का उपयोग सामान्यतः किन उपकरणों में किया जाता है?
(a) रेडियो में | (b) रेफ्रीजरेटर के दरवाज़े में | (c) लाउडस्पीकर में | (d) इनमें से सभी
Answer: (d) इनमें से सभी
Q3. उस युक्ति (Device) का नाम बताएं जो ‘विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव’ के सिद्धांत पर कार्य करती है?
(a) विद्युत मोटर | (b) गैल्वनोमीटर | (c) विद्युत जनित्र | (d) इनमें से सभी
Answer: (a) विद्युत मोटर (तथा अन्य)
Q4. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) में ‘अंगूठे’ (Thumb) द्वारा क्या प्रदर्शित होता है?
(a) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा | (b) विद्युत धारा की दिशा | (c) चालक पर लगने वाले बल की दिशा | (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) चालक पर लगने वाले बल की दिशा
Q5. साइकिल में रोशनी उत्पन्न करने के लिए किस प्रकार के डायनेमो (Dynamo) का उपयोग किया जाता है?
(a) दिष्ट धारा (DC) डायनेमो | (b) प्रत्यावर्ती धारा (AC) डायनेमो | (c) दोनों | (d) मोटर
Answer: (b) प्रत्यावर्ती धारा (AC) डायनेमो
Q6. गैल्वनोमीटर (Galvanometer) क्या है?
(a) विभवांतर मापने का यंत्र | (b) प्रतिरोध मापने का यंत्र | (c) परिपथ में विद्युत धारा की उपस्थिति संसूचित करने वाला उपकरण | (d) ऊर्जा मापने का यंत्र
Answer: (c) परिपथ में विद्युत धारा की उपस्थिति संसूचित करने वाला उपकरण
Q7. हमारे घरेलू परिपथ में सामान्यतः कौन-सी विद्युत धारा प्रवाहित होती है?
(a) दिष्ट धारा (DC) | (b) प्रत्यावर्ती धारा (AC) | (c) दोनों | (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) प्रत्यावर्ती धारा (AC)
Q8. दिष्ट धारा (Direct Current – DC) की आवृत्ति (Frequency) कितनी होती है?
(a) 50 Hz | (b) 100 Hz | (c) शून्य (0 Hz) | (d) 60 Hz
Answer: (c) शून्य (0 Hz)
Q9. दिष्ट धारा (DC) प्राप्त करने के कुछ प्रमुख स्रोत कौन-से हैं?
(a) शुष्क सेल (Dry Cell) | (b) बटन सेल | (c) लेड संचायक बैटरी (Lead Accumulator) | (d) इनमें से सभी
Answer: (d) इनमें से सभी
Q10. गैल्वनोमीटर को किसी विद्युत परिपथ में किस क्रम में जोड़ा जाता है?
(a) पार्श्वक्रम (समांतरक्रम) | (b) श्रेणीक्रम (Series) | (c) किसी भी क्रम में | (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) श्रेणीक्रम (Series)

3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

Q.1. विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव से आप क्या समझते हैं?
Ans: जब किसी चालक तार से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उस चालक के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) उत्पन्न हो जाता है। विद्युत धारा के कारण चुंबकत्व उत्पन्न होने की इसी घटना को विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं।
Q.2. चुंबकीय क्षेत्र से आप क्या समझते हैं?
Ans: किसी चुंबक (या धारावाही चालक) के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें आकर्षण और प्रतिकर्षण बलों के प्रभाव का अनुभव किसी अन्य चुंबकीय सुई या लोहे के कणों द्वारा किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) कहलाता है।
Q.3. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं क्या होती हैं?
Ans: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं वे काल्पनिक बंद वक्र (Closed Curves) पथ हैं, जिन पर कोई स्वतंत्र चुंबकीय उत्तरी ध्रुव गमन करता है। इन रेखाओं के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा (Tangent), उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और दिशा को निरूपित करती है।
Q.4. चुंबकीय क्षेत्र के तीन स्रोतों की सूची बनाएं।
Ans: चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाले तीन प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:
1. स्थायी चुंबक (Permanent Magnet)
2. विद्युत चुंबक (Electromagnet / धारावाही चालक)
3. पृथ्वी का अपना चुंबकीय क्षेत्र (Earth’s Magnetic Field)
Q.5. विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक में अंतर लिखें।
Ans: विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक में प्रमुख अंतर इस प्रकार है:
विद्युत चुंबक (Electromagnet) स्थायी चुंबक (Permanent Magnet)
इसमें प्रायः अधिक शक्तिशाली चुंबकीय बल होता है। इसमें सामान्यतः कम शक्तिशाली चुंबकीय बल होता है।
इसकी शक्ति को कुंडली में फेरों की संख्या या विद्युत धारा का मान बदलकर बढ़ाया/घटाया जा सकता है इसकी शक्ति नियत (Fixed) रहती है, इसे आसानी से बदला नहीं जा सकता।
इसमें धारा के बंद होते ही (विद्युत प्रवाह रुकते ही) चुंबकीय गुण समाप्त हो जाता है यह अधिक दिनों तक (लंबे समय तक) अपने चुंबकीय गुण को बनाए रखता है
इसकी ध्रुवता (N और S ध्रुव) धारा की दिशा बदलकर उलटी जा सकती है इसकी ध्रुवता निश्चित होती है, बदली नहीं जा सकती।
Q.6. विद्युत चुंबक किसे कहते हैं?
Ans: वैसा चुंबक जिसका चुंबकत्व उतने ही समय तक विद्यमान रहता है, जितने समय तक उसकी कुंडली (Coil) में विद्युत धारा प्रवाहित होती रहती है, उसे विद्युत चुंबक (Electromagnet) कहते हैं। इसे प्रायः नर्म लोहे (Soft Iron) के क्रोड पर तांबे के तार लपेटकर बनाया जाता है।
(नोट: पुनरावृत्ति (Revision) के दृष्टिकोण से अध्याय 12 के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न नीचे दिए गए हैं)
Q.7. विभव एवं विभवांतर में अंतर बताएं।
Ans: विभव- इकाई धन-आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य विभव कहलाता है। इसका SI मात्रक वोल्ट (V) है。
विभवांतर- इकाई धन आवेश को विद्युत क्षेत्र में एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में जितना कार्य होता है उसे विभवांतर कहते हैं। इसका भी SI मात्रक वोल्ट है।
Q.8. ओम का नियम में ताप को अचर रखा जाता है, क्यों?
Ans: ताप के बदलने से चालक का प्रतिरोध बदल जाता है, जिससे धारा का सही-सही मान प्राप्त नहीं होता है। इसलिए ओम के नियम के सत्यापन में तापक्रम को अचर (Constant) रखा जाता है।
Q.9. अर्धचालक (Semiconductor) किसे कहते हैं?
Ans: वैसे पदार्थ, जिसमें सामान्य ताप पर कुछ मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं और जिनकी चालकता सुचालक तथा कुचालक के बीच होती है। जैसे – सिलिकॉन, जर्मेनियम इत्यादि।
Q.10. अतिचालक (Superconductor) किसे कहते हैं?
Ans: वैसे पदार्थ जिसमें अति निम्न ताप पर बिना किसी प्रतिरोध के (शून्य प्रतिरोध के साथ) विद्युत का गमन होता है, अतिचालक कहलाता है। जैसे – शीशा, जिंक इत्यादि।
Q.11. विद्युत – तापन उपकरणों में नाइक्रोम तार का उपयोग क्यों किया जाता है?
Ans: विद्युत – तापन उपकरणों (हीटर, आयरन) में नाइक्रोम तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि- (i) इसका द्रवनांक (गलनांक) उच्च होता है। (ii) इसकी प्रतिरोधकता उच्च होती है। (iii) उच्च ताप पर यह शीघ्र ऑक्सीकृत (जलता) नहीं है।
Q.12. फ्यूज क्या है? इसकी क्या विशेषताएं हैं?
Ans: फ्यूज एक सुरक्षा की युक्ति है। यह ऐसे तार का टुकड़ा होता है जिसके पदार्थ की प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है और उसका गलनांक बहुत कम होता है। इसे परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है。
विशेषताएं – यह विद्युत परिपथ को अतिभारण (Overloading) और लघुपथन (Short Circuit) के कारण नष्ट होने से बचाता है।

4. दीर्घ उत्तरीय / प्रायोगिक प्रश्न (Long Answer / Practical Questions)

Q.1. विद्युत फ्यूज का कार्य स्पष्ट करने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।
Ans: प्रयोग का वर्णन:
1. एल्युमिनियम की लगभग 5cm लंबी एक पतली पत्ती (या बहुत पतला तार) लेते हैं।
2. उसके दो सिरों को मेज़ पर ऊर्ध्वाधर स्थिति में रखी लोहे की दो कीलों की नोकों के साथ जोड़ देते हैं।
3. इन कीलों को प्लग कुंजी (Switch) और एक छोटे बल्ब से होते हुए एक शक्तिशाली बैटरी के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं।
4. जैसे ही हम प्लग बंद करके परिपथ चालू करते हैं (उच्च धारा प्रवाहित करते हैं), तो हम देखते हैं कि एल्युमिनियम की वह पतली पत्ती तुरंत गर्म होकर जल (पिघल) जाती है और परिपथ भंग (टूट) हो जाता है, जिससे बल्ब बुझ जाता है।
निष्कर्ष: यही सिद्धांत विद्युत फ्यूज का है। जब परिपथ में अचानक धारा बढ़ती है, तो फ्यूज तार पिघल कर उपकरणों को जलने से बचा लेता है।
Q.2. दिष्ट धारा (DC) तथा प्रत्यावर्ती धारा (AC) में अंतर लिखें।
Ans: दिष्ट धारा (DC) तथा प्रत्यावर्ती धारा (AC) में प्रमुख अंतर:
दिष्ट धारा (Direct Current – DC) प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current – AC)
वैसी धारा जो सिर्फ एक ही दिशा में प्रवाहित होती है, दिष्ट धारा कहलाती है। वैसी धारा जो समान समय अंतरालों के पश्चात अपनी दिशा परिवर्तित कर लेती है, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है।
इस धारा का परिमाण तथा दिशा समय के साथ नियत (स्थिर) रहता है। इस धारा का परिमाण तथा दिशा समय के साथ बदलता रहता है
इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक दूर ले जाने में बहुत अधिक ऊर्जा का व्यय (नुकसान) होता है। इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक दूर ले जाने में बहुत कम ऊर्जा का व्यय होता है।
ट्रांसफॉर्मर की मदद से इस धारा के वोल्टेज को घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता है ट्रांसफॉर्मर की मदद से इस धारा के वोल्टेज को इच्छानुसार घटाया-बढ़ाया जा सकता है
इससे बैटरी को चार्ज किया जा सकता है तथा विद्युत लेपन किया जा सकता है। इससे बैटरी को सीधे चार्ज नहीं किया जा सकता है और विद्युत लेपन नहीं किया जा सकता है।
समय (t) धारा (I) दिष्ट धारा (DC) समय (t) धारा (I) प्रत्यावर्ती धारा (AC)

(चित्र: दिष्ट धारा तथा प्रत्यावर्ती धारा का समय के साथ ग्राफ)

Q.3. विद्युत चुंबकीय क्षेत्र क्या है? प्रयोग द्वारा सिद्ध करें कि जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।
Ans:
विद्युत चुंबकीय क्षेत्र: किसी विद्युत धारावाही चालक के परितः (चारों ओर) वह समस्त क्षेत्र, जिसमें उसका चुंबकीय प्रभाव एक चुंबकीय सुई द्वारा अनुभव किया जा सकता है, उसे विद्युत चुंबकीय क्षेत्र कहते हैं।

प्रयोग (गत्ते या कार्डबोर्ड का प्रयोग):
1. एक मजबूत कार्डबोर्ड (गत्ता) लेते हैं जिसके बीच में एक छिद्र रहता है। इसे क्षैतिज (Horizontal) आधार पर रखते हैं।
2. इसके बीच में स्थित छिद्र से एक तांबे का मोटा तार (AB) लंबवत (Vertical) लगाते हैं।
3. इस तार के सिरों को एक प्लग कुंजी (Switch) तथा बैटरी के ध्रुवों से जोड़ देते हैं।
4. कार्डबोर्ड के टुकड़े पर समान रूप से लोहे की कुछ बारीक कतरनें (Iron filings) फैला देते हैं।
5. कुंजी को दबाकर तार में धारा प्रवाहित करते हैं और साथ ही साथ कार्डबोर्ड को उंगली से हल्का थपथपाते भी हैं।
6. हम देखते हैं कि लोहे की कतरनें तार के चारों ओर संकेंद्रीय वृत्तों (Concentric Circles) के रूप में व्यवस्थित हो जाती हैं।
निष्कर्ष: इस प्रयोग से स्पष्ट होता है कि धारावाही चालक के समीप चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है तथा चुंबकीय बल रेखाओं की दिशा संकेंद्रीय होती है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (लोहे की कतरनें) A B धारा (I) बैटरी कुंजी

(चित्र: सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का गत्ते वाला प्रयोग)

Q.4. ऑर्स्टेड (Oersted) के प्रयोग का वर्णन करें।
Ans:
हेंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड (H.C. Oersted) ने 1820 ई. में अपने प्रसिद्ध प्रयोग द्वारा यह पता लगाया कि जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।

प्रयोग का वर्णन:
1. माना AB एक चालक तार है जिसके ठीक नीचे एक स्वतंत्र चुंबकीय सुई (Magnetic Compass – NS) रखी है।
2. जब तार से होकर कोई विद्युत धारा नहीं बहती है, तो चुंबकीय सुई में कोई विक्षेप (Deflection) नहीं होता है। सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर रहती है।
3. जैसे ही बैटरी की सहायता से तार AB में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चुंबकीय सुई अपनी मूल स्थिति से विक्षेपित (Deflect) हो जाती है।
4. तार में धारा की दिशा बदल देने पर (यानी बैटरी के टर्मिनल उलटने पर), चुंबकीय सुई के विक्षेप की दिशा भी बदल जाती है (विपरीत हो जाती है)
निष्कर्ष: इससे यह सिद्ध हुआ कि गतिमान आवेश (विद्युत धारा) अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
A B विद्युत धारा (I) N S विक्षेप चुंबकीय सुई

(चित्र: ऑर्स्टेड का प्रयोग – धारावाही चालक द्वारा चुंबकीय सुई का विक्षेपण)