विद्युत (Vidyut) Class 10 Science Chapter 12 NCERT Solution in Hindi PDF Download

1. Intro: विद्युत (Electricity)

Class 10 Science Chapter 12 (NCERT): प्रिय विद्यार्थियों! JPathshala पर आपका स्वागत है। JAC बोर्ड (झारखण्ड अधिविध परिषद् राँची) के नवीनतम पाठ्यक्रम और वार्षिक परीक्षा के महत्वपूर्ण पैटर्न को ध्यान में रखते हुए, आज हम कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 12 Vidyut (विद्युत) के सभी अति महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का सटीक समाधान पढ़ेंगे।

2. Multiple Choice Questions (20 MCQs)

Q1. विद्युत आवेश (Electric Charge) का SI मात्रक क्या है?
(a) वोल्ट ($\text{V}$) | (b) ओम ($\Omega$) | (c) कूलॉम ($\text{C}$) | (d) एंपियर ($\text{A}$)
Answer: (c) कूलॉम ($\text{C}$)
Q2. विद्युत धारा (Electric Current) का SI मात्रक क्या है?
(a) वाट ($\text{W}$) | (b) एंपियर ($\text{A}$) | (c) जूल ($\text{J}$) | (d) वोल्ट ($\text{V}$)
Answer: (b) एंपियर ($\text{A}$)
Q3. ‘कूलॉम’ ($\text{Coulomb}$) भौतिकी में किस राशि का मात्रक है?
(a) विद्युत धारा | (b) विभवांतर | (c) प्रतिरोध | (d) विद्युत आवेश
Answer: (d) विद्युत आवेश
Q4. विद्युत विभव (Electric Potential) का SI मात्रक क्या है?
(a) वोल्ट ($\text{V}$) | (b) ओम ($\Omega$) | (c) एंपियर ($\text{A}$) | (d) वाट ($\text{W}$)
Answer: (a) वोल्ट ($\text{V}$)
Q5. विभवांतर (Potential Difference) का SI मात्रक क्या होता है?
(a) ओम-मीटर ($\Omega\cdot\text{m}$) | (b) वोल्ट ($\text{V}$) | (c) कूलॉम ($\text{C}$) | (d) जूल/सेकंड
Answer: (b) वोल्ट ($\text{V}$)
Q6. चालक के विद्युत प्रतिरोध (Resistance) का SI मात्रक क्या है?
(a) ओम ($\Omega$) | (b) एंपियर ($\text{A}$) | (c) कूलॉम ($\text{C}$) | (d) वोल्ट ($\text{V}$)
Answer: (a) ओम ($\Omega$)
Q7. विद्युत प्रतिरोधकता (Resistivity) का SI मात्रक क्या है?
(a) ओम ($\Omega$) | (b) ओम/मीटर | (c) ओम-मीटर ($\Omega\cdot\text{m}$) | (d) वाट-मीटर
Answer: (c) ओम-मीटर ($\Omega\cdot\text{m}$)
Q8. किलोवाट-घंटा ($\text{kWh}$) किस भौतिक राशि का मात्रक है?
(a) विद्युत शक्ति | (b) विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक | (c) विद्युत बल | (d) विद्युत आवेश
Answer: (b) विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक
Q9. ‘ओम’ ($\Omega$) निम्नलिखित में से किस राशि का मात्रक है?
(a) विभवांतर | (b) प्रतिरोधकता | (c) प्रतिरोध | (d) विद्युत शक्ति
Answer: (c) प्रतिरोध
Q10. ‘वोल्ट/एंपियर’ ($\text{V/A}$) निम्नलिखित में से किसके तुल्य होता है?
(a) वाट ($\text{W}$) | (b) ओम ($\Omega$) | (c) कूलॉम ($\text{C}$) | (d) हेनरी
Answer: (b) ओम ($\Omega$)
Q11. “ओम $\times$ मीटर” ($\Omega\cdot\text{m}$) का उपयोग किसे मापने के लिए किया जाता है?
(a) प्रतिरोध | (b) चालकता | (c) विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता | (d) विभवांतर
Answer: (c) विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता
Q12. विद्युत शक्ति (Electric Power) का SI मात्रक क्या होता है?
(a) जूल ($\text{J}$) | (b) वाट ($\text{W}$) | (c) किलोवाट-घंटा ($\text{kWh}$) | (d) एंपियर ($\text{A}$)
Answer: (b) वाट ($\text{W}$)
Q13. विद्युत ऊर्जा का व्यापारिक (Commercial) मात्रक क्या है?
(a) जूल | (b) वाट-सेकंड | (c) किलोवाट-घंटा ($\text{kWh}$) | (d) वोल्ट-एंपियर
Answer: (c) किलोवाट-घंटा ($\text{kWh}$)
Q14. प्रतीक $\text{kWh}$ का पूर्ण रूप क्या है?
(a) किलो-इलेक्ट्रॉन वोल्ट | (b) किलोवाट-घंटा | (c) किलोवाट-हर्ट्ज़ | (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) किलोवाट-घंटा
Q15. $1\text{ kWh}$ को जूल में व्यक्त करने पर कितना मान प्राप्त होता है?
(a) $3.6 \times 10^5 \text{ J}$ | (b) $3.6 \times 10^6 \text{ J}$ | (c) $1.6 \times 10^{-19} \text{ J}$ | (d) $6 \times 10^{18} \text{ J}$
Answer: (b) $3.6 \times 10^6 \text{ J}$
Q16. एक इलेक्ट्रॉन पर उपस्थित आवेश कितने कूलॉम के तुल्य होता है?
(a) $1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$ | (b) $1.6 \times 10^{19}\text{ C}$ | (c) $9.1 \times 10^{-31}\text{ C}$ | (d) $6 \times 10^{18}\text{ C}$
Answer: (a) $1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$
Q17. एक कूलॉम आवेश कितने इलेक्ट्रॉनों पर उपस्थित कुल आवेश के तुल्य होता है?
(a) $1.6 \times 10^{-19}$ इलेक्ट्रॉन | (b) $6.25 \times 10^{18}$ इलेक्ट्रॉन | (c) $9 \times 10^{9}$ इलेक्ट्रॉन | (d) $3.6 \times 10^6$ इलेक्ट्रॉन
Answer: (b) $6.25 \times 10^{18}$ इलेक्ट्रॉन (या लगभग $6 \times 10^{18}$)
Q18. विद्युत परिपथ में बहने वाली ‘विद्युत धारा’ को मापने वाले यंत्र को क्या कहते हैं?
(a) वोल्टमीटर | (b) गैल्वेनोमीटर | (c) एमीटर ($\text{Ammeter}$) | (d) रियोस्टेट
Answer: (c) एमीटर ($\text{Ammeter}$)
Q19. परिपथ के दो बिंदुओं के बीच का ‘विभवांतर’ मापने वाले यंत्र को क्या कहते हैं?
(a) एमीटर | (b) वोल्टमीटर | (c) थर्मामीटर | (d) हाइड्रोमीटर
Answer: (b) वोल्टमीटर
Q20. विद्युत परिपथ में एमीटर ($\text{Ammeter}$) को किस क्रम में संयोजित किया जाता है?
(a) पार्श्वक्रम (समांतरक्रम) | (b) श्रेणीक्रम ($\text{Series}$) | (c) मिश्रित क्रम | (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) श्रेणीक्रम ($\text{Series}$)

3. लघु उत्तरीय प्रश्न (2 & 3 Marks Questions)

Q.1. विद्युत आवेश (Electric Charge) किसे कहते हैं? इसके प्रकारों को लिखें।
Ans: विद्युत आवेश पदार्थ का वह आंतरिक गुणधर्म है जिसके कारण वह वैद्युत एवं चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है तथा उनका अनुभव करता है। जब एक पदार्थ को दूसरे पदार्थ से रगड़ा जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण उन पर आवेश उत्पन्न होता है।
आवेश मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:
(i) धन आवेश (Positive Charge): इलेक्ट्रॉन की कमी के कारण उत्पन्न होता है।
(ii) ऋण आवेश (Negative Charge): इलेक्ट्रॉन की अधिकता के कारण उत्पन्न होता है।
Q.2. विद्युत आवेश के दो महत्वपूर्ण गुणों को लिखें।
Ans: विद्युत आवेश के दो प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
(i) सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षण: समान प्रकृति के आवेश (जैसे $++$ या $–$) एक-दूसरे को ढकेलते (प्रतिकर्षित करते) हैं।
(ii) विजातीय आवेशों में आकर्षण: विपरीत प्रकृति के आवेश (जैसे $+-$) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
Q.3. विद्युत धारा को परिभाषित करें तथा इसका SI मात्रक एवं सूत्र लिखें।
Ans: किसी चालक में विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा (Electric Current) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, प्रति एकांक समय में प्रवाहित होने वाले आवेश के परिमाण को विद्युत धारा कहते हैं।
सूत्र:
$$I = \frac{Q}{t}$$
जहाँ $I$ = विद्युत धारा, $Q$ = कुल आवेश, और $t$ = समय है।
विद्युत धारा का SI मात्रक एंपियर ($\text{A}$) होता है।
Q.4. विद्युत धारा के मात्रक (1 एंपियर) की परिभाषा लिखें।
Ans: विद्युत धारा का मात्रक एंपियर ($\text{A}$) है। यदि किसी विद्युत परिपथ के किसी अनुप्रस्थ काट से प्रति सेकंड ($1\text{ s}$) में एक कूलॉम ($1\text{ C}$) आवेश प्रवाहित होता है, तो उस परिपथ में बहने वाली विद्युत धारा को एक एंपियर ($1\text{ A}$) कहते हैं।
$$1\text{ A} = \frac{1\text{ C}}{1\text{ s}}$$
Q.5. विभव एवं विभवांतर में अंतर स्पष्ट करें।
Ans: विभव और विभवांतर में अंतर निम्नलिखित सारणी द्वारा समझा जा सकता है (मोबाइल पर देखने के लिए इसे दाएं-बाएं स्क्रॉल करें):
विद्युत विभव (Electric Potential – $V$) विद्युत विभवांतर (Potential Difference – $\Delta V$)
इकाई धन-आवेश ($+1\text{ C}$) को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य विभव कहलाता है। इकाई धन-आवेश को विद्युत क्षेत्र में ही एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य विभवांतर कहलाता है।
यह किसी एकल बिंदु की वैद्युत अवस्था को दर्शाता है। यह परिपथ के दो बिंदुओं के बीच ऊर्जा के अंतर को दर्शाता है।
इसका SI मात्रक वोल्ट ($\text{V}$) है। इसका भी SI मात्रक वोल्ट ($\text{V}$) होता है।
Q.6. ओम के नियम में तापमान को अचर (स्थिर) क्यों रखा जाता है?
Ans: किसी भी धात्विक चालक का प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है। यदि प्रयोग के दौरान तापमान बदलता है, तो चालक तार का प्रतिरोध ($R$) भी बदल जाएगा, जिससे धारा ($I$) और विभवांतर ($V$) का अनुपात समानुपाती नहीं रहेगा और हमें सही पाठ्यांक नहीं मिलेंगे। इसीलिए ओम के नियम में भौतिक परिस्थितियों जैसे तापमान को अचर (constant) रखा जाता है।
Q.7. अर्धचालक (Semiconductor) किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाएं।
Ans: वैसे पदार्थ जिनकी विद्युत चालकता चालकों (जैसे तांबा) से कम, परंतु कुचालकों (जैसे रबर) से अधिक होती है, उन्हें अर्धचालक कहते हैं। सामान्य तापमान पर इनमें कुछ मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जिसके कारण आंशिक धारा बहती है। तापमान बढ़ने पर इनकी चालकता बढ़ जाती है।
जैसे: सिलिकॉन ($\text{Si}$), जर्मेनियम ($\text{Ge}$)。
Q.8. अतिचालक (Superconductor) किसे कहते हैं? समझाएं।
Ans: कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जिनका तापमान अत्यंत निम्न (क्रिटिकल तापमान) करने पर उनका विद्युत प्रतिरोध पूर्णतः समाप्त (शून्य) हो जाता है, ऐसे पदार्थों को अतिचालक कहते हैं। इनमें बिना किसी ऊर्जा ह्रास के विद्युत धारा अनंत काल तक प्रवाहित हो सकती है।
जैसे: अत्यंत कम तापमान पर पारा ($\text{Hg}$), सीसा ($\text{Pb}$), जिंक ($\text{Zn}$)。
Q.9. विद्युत-तापन उपकरणों (जैसे हीटर, आयरन) में नाइक्रोम (Nichrome) के तार का उपयोग क्यों किया जाता है?
Ans: विद्युत-तापन उपकरणों के तापन अवयव बनाने के लिए नाइक्रोम (निकेल, क्रोमियम, मैंगनीज और लोहे की मिश्रधातु) का उपयोग किया जाता है क्योंकि:
(i) इसकी प्रतिरोधकता बहुत उच्च होती है, जिससे यह अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
(ii) इसका गलनांक अत्यंत उच्च होता है।
(iii) यह उच्च तापमान पर भी शीघ्र उपचयित (दहन/ऑक्सीकृत) नहीं होता अर्थात लाल-तप्त होने पर भी पिघलता या जलता नहीं है।
Q.10. फ्यूज (Fuse) क्या है? इसकी क्या विशेषताएं हैं?
Ans: विद्युत फ्यूज घरों के विद्युत परिपथों की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाने वाली एक सुरक्षा युक्ति (Safety Device) है। यह कम गलनांक वाले मिश्रधातु (जैसे सीसा और टिन) के पतले तार का टुकड़ा होता है, जिसे परिपथ के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
विशेषताएं:
(i) इसका प्रतिरोध उच्च और गलनांक बहुत कम होता है।
(ii) जब परिपथ में अतिभारण (Overloading) या लघुपथन (Short Circuit) के कारण अत्यधिक धारा बहती है, तो जूल तापन के कारण यह तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। इससे कीमती उपकरण नष्ट होने से बच जाते हैं।

4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks Questions)

Q.1. ओम का नियम (Ohm’s Law) लिखें और प्रयोग द्वारा इसका सत्यापन करें।
Ans:
ओम का नियम: स्थिर ताप पर किसी चालक तार के सिरों के बीच का विभवांतर ($V$) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ($I$) के समानुपाती होता है।
$$V \propto I \implies V = R I \implies R = \frac{V}{I}$$
जहाँ $R$ एक नियतांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।

+ बैटरी कुंजी (K) A + एमीटर प्रतिरोधक (R) V + वोल्टमीटर धारा नियंत्रक (Rheostat)

(चित्र 2.1: ओम के नियम के सत्यापन हेतु परिपथ आरेख)

प्रायोगिक सत्यापन की विधि:
1. ऊपर दिखाए गए परिपथ चित्र के अनुसार एक बैटरी, एमीटर ($A$), वोल्टमीटर ($V$), एक अज्ञात प्रतिरोध तार ($R$), धारा नियंत्रक (रियोस्टेट-$Rh$), और एक कुंजी ($K$) को जोड़ते हैं।
2. कुंजी $K$ में प्लग लगाकर परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं।
3. सर्वप्रथम धारा नियंत्रक ($Rh$) को एक निश्चित स्थिति पर रखकर एमीटर से धारा ($I$) और वोल्टमीटर से विभवांतर ($V$) का मान पढ़ लेते हैं और उनका अनुपात $\frac{V}{I}$ ज्ञात करते हैं।
4. अब धारा नियंत्रक के संपर्क को बदलकर परिपथ में धारा का मान बदलते हैं और प्रत्येक स्थिति में एमीटर तथा वोल्टमीटर के नए मानों को नोट करते हैं।
5. हम पाते हैं कि प्रत्येक बार विभवांतर ($V$) और धारा ($I$) का अनुपात $\frac{V}{I}$ हमेशा स्थिर (नियतांक) प्राप्त होता है, जो कि प्रतिरोध $R$ के बराबर है।
6. यदि $X$-अक्ष पर विभवांतर ($V$) तथा $Y$-अक्ष पर धारा ($I$) को लेकर एक ग्राफ खींचा जाए, तो हमें एक सरल रेखा (Straight Line) प्राप्त होती है। यह सीधे सिद्ध करता है कि $V \propto I$, जिससे ओम के नियम का सत्यापन हो जाता है।
Q.2. श्रेणीक्रम संयोजन (Series Connection) किसे कहते हैं? एक विद्युत परिपथ में तीन प्रतिरोधकों $R_1$, $R_2$ तथा $R_3$ के श्रेणीक्रम संयोजन के लिए तुल्य प्रतिरोध का सूत्र स्थापित करें।
Ans:
श्रेणीक्रम संयोजन: जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों को इस प्रकार सिरे-से-सिरा मिलाकर जोड़ा जाता है कि पहले प्रतिरोधक का दूसरा छोर, दूसरे के पहले छोर से तथा दूसरे का दूसरा छोर, तीसरे के पहले छोर से जुड़े, तो इस संयोजन को श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं। इस संयोजन में सभी प्रतिरोधकों से प्रवाहित होने वाली धारा ($I$) का मान समान रहता है, परंतु उनके सिरों के बीच का विभवांतर अलग-अलग होता है।

A B C D R₁ R₂ R₃ I (धारा) V₁ V₂ V₃ कुल विभवांतर (V)

(चित्र 2.2: तीन प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में जुड़े हुए)

तुल्य प्रतिरोध के सूत्र का व्यंजक:
मान लिया कि तीन प्रतिरोधक $R_1$, $R_2$ तथा $R_3$ श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। पूरे परिपथ में बहने वाली मुख्य विद्युत धारा का मान $I$ है।
माना कि प्रतिरोधकों $R_1$, $R_2$ और $R_3$ के सिरों के बीच के व्यक्तिगत विभवांतर क्रमशः $V_1$, $V_2$ तथा $V_3$ हैं।
परिपथ का कुल विभवांतर अलग-अलग विभवांतरों के योग के बराबर होता है:
$$V = V_1 + V_2 + V_3 \quad \dots(\text{समीकरण } 1)$$
अब, प्रत्येक प्रतिरोधक के लिए ओम के नियम से:
$$V_1 = I R_1 \quad \dots(\text{समीकरण } 2)$$
$$V_2 = I R_2 \quad \dots(\text{समीकरण } 3)$$
$$V_3 = I R_3 \quad \dots(\text{समीकरण } 4)$$
समीकरण 2, 3, और 4 के मानों को समीकरण 1 में रखने पर:
$$V = I R_1 + I R_2 + I R_3 \implies V = I (R_1 + R_2 + R_3) \quad \dots(\text{समीकरण } 5)$$
यदि इन तीनों प्रतिरोधकों के बदले परिपथ का कुल या तुल्य प्रतिरोध $R_s$ (समतुल्य प्रतिरोध) हो, तो पूरे परिपथ पर ओम का नियम लगाने पर:
$$V = I R_s \quad \dots(\text{समीकरण } 6)$$
समीकरण 5 और 6 की तुलना करने पर हमें प्राप्त होता है:
$$I R_s = I (R_1 + R_2 + R_3)$$
दोनों पक्षों से $I$ को विभाजित (काटने) करने पर:
$$\mathbf{R_s = R_1 + R_2 + R_3}$$
अतः, श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधकों का समतुल्य प्रतिरोध सभी व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योगफल के बराबर होता है।
Q.3. पार्श्वक्रम (समांतरक्रम) संयोजन किसे कहते हैं? प्रतिरोधकों $R_1$, $R_2$ तथा $R_3$ को पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर समतुल्य प्रतिरोध का व्यंजक प्राप्त करें।
Ans:
पार्श्वक्रम संयोजन (Parallel Connection): जब सभी प्रतिरोधकों के एक सिरे को एक संधि (नोड) पर तथा दूसरे सिरों को दूसरी संधि पर एक साथ जोड़ा जाता है, तो इस प्रकार के संयोजन को पार्श्वक्रम या समांतरक्रम संयोजन कहते हैं। इस संयोजन में सभी प्रतिरोधकों के सिरों के बीच का विभवांतर ($V$) समान रहता है, परंतु उनसे प्रवाहित होने वाली धारा ($I$) उनके प्रतिरोध के अनुसार अलग-अलग होती है।

I (मुख्य धारा) A R₁ I₁ R₂ I₂ R₃ I₃ B I (मुख्य धारा) V (समान विभवांतर)

(चित्र 2.3: तीन प्रतिरोधक पार्श्वक्रम/समांतरक्रम में जुड़े हुए)

तुल्य प्रतिरोध के सूत्र का व्यंजक:
मान लिया कि तीन प्रतिरोधक $R_1$, $R_2$ तथा $R_3$ पार्श्वक्रम में जुड़े हैं। इस संयोजन में प्रत्येक के सिरों का विभवांतर समान यानी $V$ रहता है।
माना कि मुख्य परिपथ की धारा $I$, नोड $A$ पर पहुँचकर तीन भागों $I_1$, $I_2$ और $I_3$ में बंट जाती है।
अतः, कुल प्रवाहित धारा का मान निम्न होगा:
$$I = I_1 + I_2 + I_3 \quad \dots(\text{समीकरण } 1)$$
अब, प्रत्येक पृथक प्रतिरोधक पर ओम का नियम लागू करने पर:
$$I_1 = \frac{V}{R_1} \quad \dots(\text{समीकरण } 2)$$
$$I_2 = \frac{V}{R_2} \quad \dots(\text{समीकरण } 3)$$
$$I_3 = \frac{V}{R_3} \quad \dots(\text{समीकरण } 4)$$
समीकरण 2, 3, और 4 के मानों को समीकरण 1 में प्रतिस्थापित करने पर:
$$I = \frac{V}{R_1} + \frac{V}{R_2} + \frac{V}{R_3} \implies I = V \left(\frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}\right) \quad \dots(\text{समीकरण } 5)$$
यदि पार्श्वक्रम संयोजन का समतुल्य प्रतिरोध $R_p$ हो, तो कुल विद्युत धारा और विभवांतर के संबंध से:
$$I = \frac{V}{R_p} \quad \dots(\text{समीकरण } 6)$$
समीकरण 5 और 6 की आपस में तुलना करने पर:
$$\frac{V}{R_p} = V \left(\frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}\right)$$
दोनों पक्षों से $V$ को विभाजित (काटने) करने पर:
$$\mathbf{\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}}$$
अतः, पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधों के समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम (Reciprocal) उनके व्यक्तिगत प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योगफल के बराबर होता है। इस संयोजन में समतुल्य प्रतिरोध का मान सबसे न्यूनतम व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से भी कम हो जाता है।
Q.4. विद्युत धारा के तापीय प्रभाव (Heating Effect) से आप क्या समझते हैं? किसी प्रतिरोधक में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उत्पन्न ऊष्मा ऊर्जा के लिए ‘जूल का नियम’ स्थापित करें।
Ans:
विद्युत धारा का तापीय प्रभाव: जब किसी उच्च प्रतिरोध वाले चालक तार (जैसे नाइक्रोम) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह अत्यंत गर्म होकर ऊष्मा (heat) उत्पन्न करने लगता है। विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा में रूपांतरित होने की इस परिघटना को विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।

ऊष्मा ऊर्जा के लिए सूत्र का निगमन (जूल का नियम):
मान लिया कि एक प्रतिरोधक $R$ है, जिससे बहने वाली विद्युत धारा $I$ है और उसके सिरों के बीच का विभवांतर $V$ है। माना कि समय $t$ में परिपथ से प्रवाहित कुल आवेश $Q$ है।
विभव की परिभाषा से, आवेश $Q$ को विभवांतर $V$ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक ले जाने में किया गया कुल कार्य ($W$):
$$W = V \times Q \quad \dots(\text{समीकरण } 1)$$
हम जानते हैं कि विद्युत धारा की परिभाषा से आवेश, $Q = I \times t$ होता है। इसे समीकरण 1 में रखने पर:
$$W = V \times (I \times t) \implies W = V I t \quad \dots(\text{समीकरण } 2)$$
अब, ओम के नियम से हम जानते हैं कि $V = I R$ होता है। $V$ का यह मान समीकरण 2 में रखने पर:
$$W = (I R) \times I t \implies W = I^2 R t \quad \dots(\text{समीकरण } 3)$$
माना कि यह संपूर्ण यांत्रिक कार्य पूरी तरह से ऊष्मा ऊर्जा ($H$) में परिवर्तित हो जाता है, तो उत्पन्न ऊष्मा का मान होगा:
$$\mathbf{H = I^2 R t}$$
इसे ही जूल का तापन नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार किसी चालक में उत्पन्न ऊष्मा:
(i) प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के वर्ग के समानुपाती होती है ($H \propto I^2$),
(ii) चालक के प्रतिरोध के समानुपाती होती है ($H \propto R$),
(iii) उस समय के समानुपाती होती है जितने समय तक धारा प्रवाहित की जाती है ($H \propto t$)।