प्रश्न 1: चंद्रगुप्त मौर्य की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर: चंद्रगुप्त मौर्य भारतीय इतिहास के प्रथम महान सम्राट थे। उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
- विशाल साम्राज्य की स्थापना: उन्होंने अपने गुरु चाणक्य की कूटनीति और मार्गदर्शन से नंद वंश के अंतिम शासक घनानंद को पराजित किया और 322 ई.पू. में मौर्य साम्राज्य की मजबूत नींव रखी।
- विदेशी शासन का अंत: उन्होंने यूनानी सेनापति सेल्यूकस निकेटर को युद्ध में हराकर उत्तर-पश्चिम भारत (काबुल, कंधार, हेरात) को विदेशी दासता से पूरी तरह मुक्त कराया।
- अखंड भारत का निर्माण: भारत के इतिहास में पहली बार उन्होंने विभिन्न छोटे-छोटे राज्यों को जीतकर एक विशाल, अखंड और एकीकृत राष्ट्र का निर्माण किया।
- सुदृढ़ प्रशासन: उन्होंने एक अत्यंत मजबूत और केंद्रीकृत शासन व्यवस्था स्थापित की, जिसने भविष्य के शासकों के लिए एक बेहतरीन मार्ग प्रशस्त किया।
प्रश्न 2: मौर्य वंश के नगर प्रशासन का वर्णन करें।
उत्तर: यूनानी राजदूत मेगस्थनीज की पुस्तक ‘इंडिका’ के अनुसार, मौर्य काल में राजधानी पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन अत्यंत सुव्यवस्थित और आधुनिक था। नगर का प्रबंध 30 सदस्यों का एक मंडल करता था, जो 5-5 सदस्यों वाली 6 अलग-अलग समितियों में विभाजित था:
- प्रथम समिति (शिल्प कला समिति): यह समिति नगर के उद्योगों, शिल्पकारों के कार्यों, उनके वेतन और काम की गुणवत्ता का नियमित निरीक्षण करती थी।
- द्वितीय समिति (विदेशी समिति): इसका मुख्य कार्य नगर में आने वाले विदेशियों के निवास, भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा का उचित प्रबंध करना था।
- तृतीय समिति (जनगणना समिति): यह समिति जन्म और मृत्यु का सटीक रिकॉर्ड रखती थी, जिससे सरकार को जनसंख्या की सही जानकारी और कर निर्धारण में मदद मिलती थी।
- चतुर्थ समिति (व्यापार और वाणिज्य समिति): यह बाजार की व्यवस्था, व्यापारियों के सामान और सही बाट-माप की कड़ाई से जाँच करती थी।
- पंचम समिति (वस्तु निरीक्षण समिति): यह कारखानों में निर्मित वस्तुओं की शुद्धता की जाँच करती थी और यह सुनिश्चित करती थी कि पुरानी वस्तुओं को नई के साथ मिलाकर न बेचा जाए।
- षष्ठ समिति (बिक्री कर समिति): यह समिति बेचे गए सामान के मूल्य का दसवाँ भाग (1/10) कर (Sales Tax) के रूप में वसूलती थी। कर चोरी करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान था।