1. Intro: आनुवंशिकता एवं जैव विकास
Class 10 Science Chapter 8: प्रिय विद्यार्थियों! JPathshala पर आपका स्वागत है। JAC बोर्ड (झारखण्ड अधिविध परिषद् राँची) द्वारा संचालित पाठ्यक्रम और वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, आज हम कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 8 Anuwanshikta evan Jaiv Vikas (आनुवंशिकता एवं जैव विकास) के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों का सटीक एवं सुलभ समाधान पढ़ेंगे।
2. 1 अंक स्तरीय प्रश्न (MCQs)
Q1. उस पादप (पौधे) का नाम बताएं जिस पर ग्रेगर जॉन मेंडल ने अपने आनुवंशिकी के प्रयोग किए थे?
Answer: (b) मटर का पौधा
Q2. जीवों की आनुवंशिक इकाई (Unit of Heredity) क्या है?
Answer: (c) जीन (Gene)
Q3. ‘जीन’ (Gene) शब्द का नामकरण किस वैज्ञानिक ने किया था?
Answer: (c) जोहान्सन
Q4. कोशिका में जीन कहाँ पाए जाते हैं?
Answer: (c) गुणसूत्रों पर
Q5. गुणसूत्र XY और XX किन नामों से जाने जाते हैं?
Answer: (b) लिंग गुणसूत्र
Q6. मानव में अंडाणु या शुक्राणु में से कौन बच्चे के लिंग (Sex) का निर्धारण करता है?
Answer: (b) शुक्राणु (पिता का गुणसूत्र)
Q7. एक नवजात बच्चे की कोशिकाओं में XY गुणसूत्र-युग्म पाया गया। यह बच्चा लड़का है अथवा लड़की?
Answer: (b) लड़का
Q8. उस वैज्ञानिक का नाम लिखें जिसने पैतृक लक्षणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी आनुवंशिक होने का अध्ययन प्रथम बार किया था?
Answer: (b) ग्रेगर जॉन मेंडल (इन्हें आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है)
Q9. जीवों के बीच विकासीय संबंध स्थापित करने में किस विधि का प्रयोग व्यापक स्तर पर किया जाता है?
Answer: (b) DNA की संरचना का तुलनात्मक अध्ययन
Q10. डायनासोर जैविक वर्गीकरण के आधार पर क्या थे?
Answer: (c) सरीसृप
Q11. वह कौन-सा कारक है जो वंशागत लक्षणों को नियंत्रित करता है?
Answer: (a) जीन
Q12. जीवधारियों में पाए जाने वाले उन लक्षणों को क्या कहते हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होते हैं?
Answer: (b) आनुवंशिक लक्षण
Q13. D.N.A. (डी० एन० ए०) का पूर्णरूप (Full Form) क्या है?
Answer: (a) Deoxyribonucleic Acid (डिऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक एसिड)
Q14. गुणसूत्र (Chromosome) के प्रमुख भौतिक घटक कौन-कौन से हैं?
Answer: (b) क्रोमैटिड और सेंट्रोमियर (रासायनिक रूप से DNA और प्रोटीन)
Q15. मनुष्यों की सामान्य कोशिकाओं में गुणसूत्रों की कुल कितनी संख्या होती है?
Answer: (c) 23 जोड़ी
Q16. कोशिका विभाजन की किस अवस्था में गुणसूत्रों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है?
Answer: (a) पूर्वावस्था (Prophase) / मध्यावस्था
Q17. D.N.A. में पाए जाने वाले नाइट्रोजन युक्त क्षार मुख्य रूप से किन दो प्रकारों में बँटे होते हैं?
Answer: (b) प्यूरीन एवं पाइरीमिडीन
Q18. ऐसे दो बच्चों को जो एक ही निषेचित अंडाणु (Zygote) के विभाजन से विकसित होते हैं, क्या कहते हैं?
Answer: (b) समरूप (Identical) जुड़वाँ
Q19. किसी बालक के हाथ में पाँच के बदले छह अंगुलियों का होना किस प्रकार की घटना का परिणाम है?
Answer: (b) उत्परिवर्तन या विच्छिन्न विभिन्नता
Q20. RNA और DNA में मुख्य अंतर किस शर्करा (Sugar) का होता है?
Answer: (b) RNA में राइबोज (Ribose) शर्करा होती है।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
Q.1. आनुवंशिकता (Heredity) की परिभाषा दें।
Ans: वह जटिल जैविक प्रक्रम जिसके अंतर्गत लैंगिक या अलैंगिक जनन के माध्यम से माता-पिता (जनकों) के विशिष्ट लक्षण उनकी संतानों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचते रहते हैं, आनुवंशिकता कहलाती है।
Q.2. आनुवंशिक लक्षण किन्हें कहते हैं?
Ans: जीवों के ऐसे लक्षण (Traits) जो उनके DNA (जीन) में निहित होते हैं और जो जनन के दौरान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित होते रहते हैं, उन्हें आनुवंशिक गुण या लक्षण कहते हैं। उदाहरण: आँखों का रंग, बालों का प्रकार आदि।
Q.3. लक्षणों की वंशागति के क्या नियम हैं (मेंडल के नियम)?
Ans: मेंडल द्वारा प्रतिपादित लक्षणों की वंशागति के मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:
(i) प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): लक्षण दो प्रकार के होते हैं – प्रभावी (Dominant) व अप्रभावी (Recessive)। प्रथम पीढ़ी (F1) में केवल प्रभावी लक्षण ही परिलक्षित (प्रकट) होते हैं।
(ii) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): युग्मकों के निर्माण के समय कारकों (जीन) के जोड़े अलग-अलग हो जाते हैं, और इनमें से केवल एक ही कारक किसी एक युग्मक में जाता है।
(i) प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): लक्षण दो प्रकार के होते हैं – प्रभावी (Dominant) व अप्रभावी (Recessive)। प्रथम पीढ़ी (F1) में केवल प्रभावी लक्षण ही परिलक्षित (प्रकट) होते हैं।
(ii) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): युग्मकों के निर्माण के समय कारकों (जीन) के जोड़े अलग-अलग हो जाते हैं, और इनमें से केवल एक ही कारक किसी एक युग्मक में जाता है।
Q.4. लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome) क्या है? मनुष्य में कितने लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं?
Ans: वह गुणसूत्र जो किसी जीव में नर या मादा (लिंग) का निर्धारण करने के लिए उत्तरदायी होता है, लिंग गुणसूत्र कहलाता है। मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से अंतिम एक जोड़ा (1 pair) लिंग गुणसूत्र कहलाता है। महिलाओं में यह XX तथा पुरुषों में XY होता है।
Q.5. जीनों (Genes) की विशेषताओं का उल्लेख करें।
Ans: जीनों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
(i) ये आनुवंशिक पदार्थों की इकाइयाँ हैं, जो DNA के विशिष्ट खंड होते हैं।
(ii) इनमें स्वयं का द्विगुणन (Replication) करने की क्षमता होती है।
(iii) ये शारीरिक लक्षणों (जैसे रंग, ऊँचाई) एवं क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं और प्रोटीन निर्माण के लिए सूचना प्रदान करते हैं。
(iv) जीन उत्परिवर्तित (Mutate) होकर जीवों में विभिन्नताएं उत्पन्न कर सकते हैं।
(i) ये आनुवंशिक पदार्थों की इकाइयाँ हैं, जो DNA के विशिष्ट खंड होते हैं।
(ii) इनमें स्वयं का द्विगुणन (Replication) करने की क्षमता होती है।
(iii) ये शारीरिक लक्षणों (जैसे रंग, ऊँचाई) एवं क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं और प्रोटीन निर्माण के लिए सूचना प्रदान करते हैं。
(iv) जीन उत्परिवर्तित (Mutate) होकर जीवों में विभिन्नताएं उत्पन्न कर सकते हैं।
Q.6. जीन-प्रवाह (Gene Flow) क्या है?
Ans: जीन-प्रवाह: जब किसी एक समष्टि (Population) के जीव प्रवास करके किसी दूसरी नई समष्टि में जाते हैं और वहाँ जनन करते हैं, तो उनके जीन उस नई समष्टि में प्रवेश कर जाते हैं। जीनों के इस स्थानांतरण को जीन-प्रवाह कहते हैं। यह उन समष्टियों में होता है जो आंशिक रूप से अलग-अलग होती हैं।
Q.7. विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज की उत्तरजीविता (Survival) की संभावना क्यों बढ़ जाती है?
Ans: विभिन्नताओं के कारण एक ही प्रजाति के जीवों में अलग-अलग क्षमताएं विकसित हो जाती हैं। यदि पर्यावरण में अचानक कोई भयंकर परिवर्तन (जैसे अत्यधिक गर्मी, बीमारी या जलस्तर में बदलाव) आ जाए, तो पूरी प्रजाति के नष्ट होने का खतरा रहता है। परंतु, जिन जीवों में उस परिवर्तन को सहने के अनुकूल विभिन्नता होती है (जैसे अत्यधिक उष्मा सहने वाले जीवाणु), वे जीवित रह जाते हैं। इस प्रकार विभिन्नताएं स्पीशीज को विलुप्त होने से बचाती हैं।
Q.8. डी० एन० ए० (DNA) आनुवंशिकता का आधार है। कैसे?
Ans: DNA को आनुवंशिकता का आधार माना जाता है क्योंकि:
(i) इसमें द्विगुणन (Replication) की क्षमता होती है, जिससे यह अपनी हूबहू कॉपी बना सकता है।
(ii) जनन के दौरान माता-पिता का DNA ही संतान में जाता है।
(iii) यह जीवों की सभी कोशिकाओं के केंद्रक में पाया जाता है।
(iv) DNA में ही प्रोटीन निर्माण की सारी सूचनाएँ (जीन के रूप में) कोडित (Coded) होती हैं, जो जीव के लक्षणों को तय करती हैं।
(i) इसमें द्विगुणन (Replication) की क्षमता होती है, जिससे यह अपनी हूबहू कॉपी बना सकता है।
(ii) जनन के दौरान माता-पिता का DNA ही संतान में जाता है।
(iii) यह जीवों की सभी कोशिकाओं के केंद्रक में पाया जाता है।
(iv) DNA में ही प्रोटीन निर्माण की सारी सूचनाएँ (जीन के रूप में) कोडित (Coded) होती हैं, जो जीव के लक्षणों को तय करती हैं।
Q.9. सूक्ष्म विकास (Microevolution) किसे कहते हैं?
Ans: किसी स्पीशीज (प्रजाति) की आबादी के भीतर पीढ़ियों के दौरान जीन आवृत्तियों (Gene frequencies) में होने वाले छोटे आनुवंशिक परिवर्तनों को सूक्ष्म विकास कहते हैं। ये परिवर्तन जीवों के सामान्य लक्षणों व गुणों में थोड़ा बदलाव कर देते हैं (जैसे भृंगों के रंग में बदलाव), लेकिन इससे तुरंत कोई नई प्रजाति नहीं बनती।
Q.10. जीवाश्मों (Fossils) की आयु ज्ञात करने के लिए किन-किन विधियों का सहारा लिया जाता है?
Ans: जीवाश्मों की आयु ज्ञात करने की दो मुख्य विधियां हैं:
(i) सापेक्ष विधि: जब हम खुदाई करते हैं, तो पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए (हाल के) होते हैं。
(ii) रेडियोमेट्रिक डेटिंग (रेडियो सक्रिय समस्थानिक विधि): इसमें जीवाश्म में पाए जाने वाले किसी तत्व के रेडियोधर्मी समस्थानिक (जैसे कार्बन-14 या पोटेशियम-आर्गन) के क्षय की दर का उपयोग करके आयु निकाली जाती है। (रेडियो सक्रिय कार्बन विधि सबसे प्रचलित है)।
(i) सापेक्ष विधि: जब हम खुदाई करते हैं, तो पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए (हाल के) होते हैं。
(ii) रेडियोमेट्रिक डेटिंग (रेडियो सक्रिय समस्थानिक विधि): इसमें जीवाश्म में पाए जाने वाले किसी तत्व के रेडियोधर्मी समस्थानिक (जैसे कार्बन-14 या पोटेशियम-आर्गन) के क्षय की दर का उपयोग करके आयु निकाली जाती है। (रेडियो सक्रिय कार्बन विधि सबसे प्रचलित है)।
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
Q.1. आनुवंशिकी (Genetics) की परिभाषा दें। आनुवंशिकता में मेंडल का क्या योगदान है?
Ans:
आनुवंशिकी की परिभाषा: जीव विज्ञान की वह विशेष शाखा जिसके अंतर्गत आनुवंशिकता की सूक्ष्म क्रिया-विधि, वंशागति के नियमों, आनुवंशिकता के प्रभावों एवं विभिन्नताओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है, आनुवंशिकी (Genetics) कहलाती है।
मेंडल का योगदान:
ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) ने आनुवंशिकी के क्षेत्र में अति महत्वपूर्ण योगदान दिया, इसलिए उन्हें ‘आनुवंशिकी का जनक’ (Father of Genetics) कहा जाता है। उन्होंने बगीचे की मटर (Pisum sativum) के पौधों पर संकरण (Cross-breeding) के कई वर्षों तक प्रयोग किए और वंशागति के तीन मूलभूत नियमों को प्रतिपादित किया:
1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): संकरण में भाग लेने वाले पौधों के विपरीत लक्षणों में से प्रथम पीढ़ी (F1) में जो गुण प्रकट होता है उसे प्रभावी (Dominant) और जो गुण छिप जाता है उसे अप्रभावी (Recessive) गुण कहते हैं。
2. पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): युग्मकों के निर्माण के समय जीन के जोड़े (Alleles) अलग-अलग हो जाते हैं। दोनों कारक कभी भी एक साथ युग्मक में नहीं जाते, बल्कि युग्मक में केवल एक ही कारक पहुँचता है, जिससे युग्मक शुद्ध होते हैं。
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): दो या दो से अधिक लक्षणों के कारक एक-दूसरे को प्रभावित किए बिना स्वतंत्र रूप से युग्मकों में जाते हैं और अगली पीढ़ी में स्वतंत्र रूप से प्रकट होते हैं।
आनुवंशिकी की परिभाषा: जीव विज्ञान की वह विशेष शाखा जिसके अंतर्गत आनुवंशिकता की सूक्ष्म क्रिया-विधि, वंशागति के नियमों, आनुवंशिकता के प्रभावों एवं विभिन्नताओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है, आनुवंशिकी (Genetics) कहलाती है।
मेंडल का योगदान:
ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) ने आनुवंशिकी के क्षेत्र में अति महत्वपूर्ण योगदान दिया, इसलिए उन्हें ‘आनुवंशिकी का जनक’ (Father of Genetics) कहा जाता है। उन्होंने बगीचे की मटर (Pisum sativum) के पौधों पर संकरण (Cross-breeding) के कई वर्षों तक प्रयोग किए और वंशागति के तीन मूलभूत नियमों को प्रतिपादित किया:
1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): संकरण में भाग लेने वाले पौधों के विपरीत लक्षणों में से प्रथम पीढ़ी (F1) में जो गुण प्रकट होता है उसे प्रभावी (Dominant) और जो गुण छिप जाता है उसे अप्रभावी (Recessive) गुण कहते हैं。
2. पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): युग्मकों के निर्माण के समय जीन के जोड़े (Alleles) अलग-अलग हो जाते हैं। दोनों कारक कभी भी एक साथ युग्मक में नहीं जाते, बल्कि युग्मक में केवल एक ही कारक पहुँचता है, जिससे युग्मक शुद्ध होते हैं。
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): दो या दो से अधिक लक्षणों के कारक एक-दूसरे को प्रभावित किए बिना स्वतंत्र रूप से युग्मकों में जाते हैं और अगली पीढ़ी में स्वतंत्र रूप से प्रकट होते हैं।
Q.2. मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न विकल्पी लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं? (द्विसंकर क्रॉस)
Ans: मेंडल ने मटर के पौधे के दो विकल्पी लक्षणों के जोड़ों का एक साथ अध्ययन करने के लिए द्विसंकर क्रॉस (Dihybrid Cross) कराया।
इसके लिए उन्होंने गोल बीजों वाले लंबे पौधों तथा झुर्रीदार बीजों वाले बौने पौधों के बीच संकरण (Cross) कराया।
निष्कर्ष:
1. F1 पीढ़ी: प्रथम पीढ़ी में सभी पौधे लंबे और गोल बीजों वाले प्राप्त हुए। इससे यह पता चला कि लंबाई तथा बीज का गोल आकार प्रभावी (Dominant) लक्षण हैं।
2. F2 पीढ़ी: जब F1 पीढ़ी के पौधों में स्व-परागण कराया गया, तो दूसरी पीढ़ी (F2) में उन्हें चार प्रकार के नए संयोजन प्राप्त हुए (अनुपात 9:3:3:1)।
इनमें से कुछ पौधे ‘लंबे परंतु झुर्रीदार बीजों वाले’ थे, जबकि कुछ पौधे ‘बौने और गोल बीजों वाले’ थे।
उपर्युक्त दोनों दशाओं से यह सिद्ध होता है कि लंबाई (लंब/बौना) और बीज का आकार (गोल/झुर्रीदार) आपस में बंधे हुए नहीं हैं। ये परस्पर स्वतंत्र लक्षण हैं और यह स्वतंत्रता पूर्वक अगली पीढ़ी में वंशानुगत होते हैं।
इसके लिए उन्होंने गोल बीजों वाले लंबे पौधों तथा झुर्रीदार बीजों वाले बौने पौधों के बीच संकरण (Cross) कराया।
निष्कर्ष:
1. F1 पीढ़ी: प्रथम पीढ़ी में सभी पौधे लंबे और गोल बीजों वाले प्राप्त हुए। इससे यह पता चला कि लंबाई तथा बीज का गोल आकार प्रभावी (Dominant) लक्षण हैं।
2. F2 पीढ़ी: जब F1 पीढ़ी के पौधों में स्व-परागण कराया गया, तो दूसरी पीढ़ी (F2) में उन्हें चार प्रकार के नए संयोजन प्राप्त हुए (अनुपात 9:3:3:1)।
इनमें से कुछ पौधे ‘लंबे परंतु झुर्रीदार बीजों वाले’ थे, जबकि कुछ पौधे ‘बौने और गोल बीजों वाले’ थे।
उपर्युक्त दोनों दशाओं से यह सिद्ध होता है कि लंबाई (लंब/बौना) और बीज का आकार (गोल/झुर्रीदार) आपस में बंधे हुए नहीं हैं। ये परस्पर स्वतंत्र लक्षण हैं और यह स्वतंत्रता पूर्वक अगली पीढ़ी में वंशानुगत होते हैं।
(चित्र: मेंडल का एकल संकरण प्रयोग – F1 पीढ़ी में प्रभाविता का नियम)
Q.3. मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण (Sex Determination) कैसे होता है?
Ans: किसी शिशु के जन्म से पूर्व उसके नर (लड़का) अथवा मादा (लड़की) होने की प्रक्रिया को लिंग निर्धारण कहते हैं। मानव में लिंग का निर्धारण लिंग-गुणसूत्रों द्वारा होता है।
• महिलाओं (स्त्रियों) की प्रत्येक कोशिका में दोनों लिंग गुणसूत्र एक ही प्रकार के होते हैं, जिन्हें XX कहा जाता है। इसलिए महिलाएं केवल एक ही प्रकार के अंडाणु (Egg) उत्पन्न करती हैं, जिनमें केवल X गुणसूत्र होता है。
• पुरुषों में दोनों लिंग गुणसूत्र अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिन्हें XY कहा जाता है। पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु (Sperms) बराबर मात्रा में उत्पन्न करते हैं। 50% शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है और शेष 50% शुक्राणुओं में Y गुणसूत्र होता है。
लिंग निर्धारण की प्रक्रिया:
1. जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे (X) से संयोग (निषेचन) करता है, तो युग्मनज (Zygote) में XX गुणसूत्र हो जाते हैं और वह लड़की (मादा) में विकसित होता है。
2. जब Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे (X) को निषेचित करता है, तो युग्मनज में XY गुणसूत्र हो जाते हैं और वह लड़के (नर) में विकसित होता है。
अतः, बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता के शुक्राणु पर निर्भर करता है।
• महिलाओं (स्त्रियों) की प्रत्येक कोशिका में दोनों लिंग गुणसूत्र एक ही प्रकार के होते हैं, जिन्हें XX कहा जाता है। इसलिए महिलाएं केवल एक ही प्रकार के अंडाणु (Egg) उत्पन्न करती हैं, जिनमें केवल X गुणसूत्र होता है。
• पुरुषों में दोनों लिंग गुणसूत्र अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिन्हें XY कहा जाता है। पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु (Sperms) बराबर मात्रा में उत्पन्न करते हैं। 50% शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है और शेष 50% शुक्राणुओं में Y गुणसूत्र होता है。
लिंग निर्धारण की प्रक्रिया:
1. जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे (X) से संयोग (निषेचन) करता है, तो युग्मनज (Zygote) में XX गुणसूत्र हो जाते हैं और वह लड़की (मादा) में विकसित होता है。
2. जब Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे (X) को निषेचित करता है, तो युग्मनज में XY गुणसूत्र हो जाते हैं और वह लड़के (नर) में विकसित होता है。
अतः, बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता के शुक्राणु पर निर्भर करता है।
(चित्र: मानव में शिशु का लिंग निर्धारण आरेख)
Q.4. जीवाश्म (Fossils) क्या हैं? वे जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं?
Ans: जीवाश्म की परिभाषा: लाखों-करोड़ों वर्ष पूर्व के मृत जंतुओं और पौधों के कठोर अंगों (जैसे हड्डियां, दांत) की छाप अथवा उनके अवशेष जो पृथ्वी की चट्टानों (अवसादी चट्टानों) के बीच में सुरक्षित दबे हुए पाए जाते हैं, उन्हें जीवाश्म (Fossils) कहते हैं।
जैव-विकास प्रक्रम के विषय में जीवाश्मों का महत्व:
जीवाश्म हमें जैव-विकास (Evolution) के बारे में निम्नांकित महत्त्वपूर्ण बातें दर्शाते हैं:
1. वे हमें बताते हैं कि ऐसी कौन सी स्पीशीज (प्रजातियाँ) हैं जो कभी पृथ्वी पर जीवित थीं परंतु अब विलुप्त (Extinct) हो गई हैं (जैसे डायनासोर)।
2. ऐसे जीवों के अवशेष जीवाश्म के रूप में मिले हैं जो कि एक वर्ग के जीवों और उनसे विकसित उच्च वर्ग के जीवों के बीच की ‘योजक कड़ी’ (Connecting Link) का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx) का जीवाश्म यह दर्शाता है कि पक्षियों का विकास सरीसृपों (Reptiles) से हुआ है।
3. जीवाश्म पृथ्वी के अंदर विभिन्न स्तरों पर खुदाई करके निकाले जाते हैं। इससे यह पता चलता है कि पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए (सरल से जटिल जीवों के विकास का क्रम) हैं।
जैव-विकास प्रक्रम के विषय में जीवाश्मों का महत्व:
जीवाश्म हमें जैव-विकास (Evolution) के बारे में निम्नांकित महत्त्वपूर्ण बातें दर्शाते हैं:
1. वे हमें बताते हैं कि ऐसी कौन सी स्पीशीज (प्रजातियाँ) हैं जो कभी पृथ्वी पर जीवित थीं परंतु अब विलुप्त (Extinct) हो गई हैं (जैसे डायनासोर)।
2. ऐसे जीवों के अवशेष जीवाश्म के रूप में मिले हैं जो कि एक वर्ग के जीवों और उनसे विकसित उच्च वर्ग के जीवों के बीच की ‘योजक कड़ी’ (Connecting Link) का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx) का जीवाश्म यह दर्शाता है कि पक्षियों का विकास सरीसृपों (Reptiles) से हुआ है।
3. जीवाश्म पृथ्वी के अंदर विभिन्न स्तरों पर खुदाई करके निकाले जाते हैं। इससे यह पता चलता है कि पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए (सरल से जटिल जीवों के विकास का क्रम) हैं।